कोल इंडिया बोनस: कर्मचारियों को 1,10,250 रुपये का पीएलआर तय, राशि बढ़ी लेकिन बढ़ोतरी की रफ्तार घटी, यूनियन रणनीति पर उठे सवाल

धनपुरी / कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड सोहागपुर क्षेत्र सहित पूरे कोयला उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए एक तरफ खुशी की खबर है तो दूसरी तरफ चिंता की भी। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) मुख्यालय कोलकाता में 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित द्विपक्षीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निष्पादन संबद्ध पुरस्कार (पीएलआर) की राशि 1,10,250 रुपये तय की गई है।
प्रबंधन पक्ष की ओर से कोल इंडिया के अध्यक्ष श्री बी. साईराम, निदेशक (विपणन एवं मानव संसाधन अतिरिक्त प्रभार) श्री मुकेश चौधरी, निदेशक (वित्त) श्री मुकेश अग्रवाल, निदेशक (कार्मिक एवं कल्याण) एससीसीएल श्री गौथम पोत्रु (आईएएस) एवं महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री दुर्गा प्रसाद सामल उपस्थित रहे।
श्रमिक पक्ष की ओर से बीएमएस से श्री के. लक्ष्मा रेड्डी, एचएमएस से श्री हरभजन सिंह सिद्धू, एटक से श्री लखन लाल महतो (श्री रामेन्द्र कुमार के प्रतिनिधि के रूप में) एवं सीटू से श्री डी.डी. रामानंदन उपस्थित थे। एटक के श्री रामेन्द्र कुमार अस्वस्थता के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सीआईएल, उसकी सभी अनुषंगी कंपनियों ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल, डब्ल्यूसीएल, एसईसीएल, एनसीएल, एमसीएल, सीएमपीडीआई तथा एससीसीएल के पात्र गैर-कार्यपालक कर्मचारियों को यह राशि आनुपातिक आधार पर 15 अक्टूबर 2026 या उससे पूर्व भुगतान की जाएगी। बैठक में 815 मिलियन टन उत्पादन और 850 मिलियन टन प्रेषण का लक्ष्य तय करने पर भी सहमति बनी।

बोनस बढ़ा, पर ग्रोथ घटी
पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बोनस की कुल राशि में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सालाना वृद्धि की दर लगातार नीचे आई है।
2023 में पीएलआर में 11.11 फीसदी की वृद्धि हुई थी, वहीं 2024 में यह 10.29 फीसदी, 2025 में 9.87 फीसदी और 2026 में घटकर मात्र 7.04 फीसदी रह गई।
अर्थात राशि तो बढ़ रही है, लेकिन बढ़ोतरी की रफ्तार आधी से भी कम हो गई है। इसे लेकर जमीनी स्तर पर श्रमिक संगठनों की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। श्रमिकों का कहना है कि कंपनी का मुनाफा और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुपात में बोनस की वृद्धि नहीं हो रही है।
दीपावली से पूर्व 1.10 लाख से अधिक की राशि मिलने से कर्मचारियों में प्रसन्नता है, लेकिन घटती वृद्धि दर ने आने वाले वर्षों की वार्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।