वह रे राम विशाल तेरी लीला धनपुरी कहीं सूखा कहीं गीला

स्वच्छता के भाषण, गंदगी की सत्ता
धनपुरी नगर पालिका चैंबर में कैद, शहर संक्रमण के हवाले
फाइलों में साफ शहर, सड़कों पर गंदगी का अंबार
धनपुरी नगर पालिका की स्वच्छता व्यवस्था फेल
स्वच्छता का ढोंग, गंदगी का साम्राज्य
धनपुरी नगर पालिका कुर्सी-चैंबर में कैद, शहर सड़कों पर सड़ रहा
शहडोल -धनपुरी।26 जनवरी के मंचों से स्वच्छता के भाषण गूंजते रहे, नगर में खेल आयोजनों की चमक दिखाई गई, लेकिन उसी दिन धनपुरी की सड़कों पर गंदगी, कीचड़ और बदबू ने नगर पालिका की असलियत उजागर कर दी।
नगर पालिका धनपुरी में स्वच्छता केवल कागज़ों, बैनरों और फोटो सेशन तक सीमित रह गई है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि नगर के कई इलाकों में कूड़े-कचरे के ढेर खुलेआम पड़े हैं।
स्कूल के सामने संक्रमण, जिम्मेदार मौन
नगर के हृदय स्थल पर स्थित रेड रोज हाई सेकेंडरी स्कूल के सामने पसरी गंदगी बच्चों के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ है।
छोटे-छोटे छात्र रोज़ उसी गंदगी और कीचड़ के बीच से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन न नगर पालिका जाग रही है, न स्वास्थ्य महकमा।
सफाई सिर्फ़ रिपोर्ट में, सड़कें नरक में
गद्दा सड़क पानी, कीचड़ और कचरे का स्थायी डंपिंग ज़ोन बन चुकी है।
नगर की सफाई व्यवस्था कागज़ों में चमकती है, सड़कों पर दम तोड़ती है।
प्रश्न उठता है कि हर महीने स्वच्छता के नाम पर जारी होने वाला बजट आखिर जा कहां रहा है?
चैंबर से बाहर नहीं निकलती सत्ता
नगर पालिका के अधिकारी वातानुकूलित चैंबरों में बैठकर स्वच्छता के निर्देश जारी करते हैं,
लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि वह कुर्सी छोड़कर नगर की गलियों का निरीक्षण कर ले।
घंटी बजते ही तैनात कर्मचारी, “जी मैडम” की रट और चापलूसी की संस्कृति—
यही धनपुरी नगर पालिका की पहचान बनती जा रही है।
‘सख्ती’ सिर्फ़ कहने की
जानकार बताते हैं कि जिम्मेदार अधिकारी स्वच्छता को लेकर “बहुत सख्त” हैं।
अगर ऐसा है तो सवाल साफ है—
नगर गंदगी में डूबा क्यों है?
बच्चे बीमार क्यों हो रहे हैं?
सफाईकर्मी जमीन पर क्यों नहीं दिखते?

कहीं सूखा, कहीं गीला— सिस्टम राम भरोसे
नगर में सफाई का हाल “कहीं सूखा, कहीं गीला” जैसा है—
यानि जहां फोटो खिंचनी है, वहां झाड़ू; बाकी जगह भगवान भरोसे।
आईना दिखाना ज़रूरी है
यह खबर किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि एक निकम्मी व्यवस्था का सार्वजनिक पोस्टमार्टम है।
यदि जिम्मेदार लोग अपनी कुर्सी की गरिमा नहीं निभा सकते, तो सवाल सीधा ह
पद पर बने रहने का अधिकार आखिर किसने दिया?
नगरवासी अब जवाब चाहते हैं,
और अगर जवाब नहीं मिला तो सड़कों की गंदगी जल्द ही आंदोलन में बदल सकती है।