धनपुरी-बुढार रोड पर मौत से खेल: 33 केवी लाइन में ‘जल्दी और मुनाफा’ की अंधी दौड़, रमजान में बिना विधुत के बिना परेशान हो रही जनता — जिम्मेदार कौन?

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धनपुरी/बुढार।
धनपुरी-बुढार रोड इन दिनों विकास नहीं, बल्कि लापरवाही, भ्रष्ट मानसिकता और इंसानी जान की अनदेखी का खौफनाक उदाहरण बन चुका है। 33 केवी हाई टेंशन लाइन के विद्युतीकरण कार्य के नाम पर जो कुछ जमीन पर हो रहा है, वह किसी भी जिम्मेदार प्रशासन और व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। एक तरफ 13 मीटर ऊंचे पोलों पर बिना किसी सुरक्षा के मजदूरों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है, तो दूसरी तरफ रमजान जैसे पवित्र महीने में घंटों बिजली गुल रहने से आम जनता बेहाल है। सवाल साफ है—क्या यहां विकास के नाम पर केवल बिल पास कराने और जेबें भरने का खेल चल रहा है?
नगर पालिका धनपुरी की निगरानी में चल रहे इस कार्य में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मजदूरों को बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना हेलमेट, बिना इंसुलेटेड ग्लव्स और बिना किसी प्रमाणित उपकरण के सिर्फ रस्सियों के सहारे 33 केवी के खतरनाक पोलों पर चढ़ाया जा रहा है। नीचे खड़े लोग सांस थामे इस खतरनाक मंजर को देखते हैं, क्योंकि उन्हें पता है—एक चूक और सब खत्म। लेकिन ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए यह सिर्फ “काम जल्दी खत्म करो और भुगतान लो” का मामला बन चुका है।


विद्युत विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि 33 केवी लाइन पर कार्य बिना शटडाउन, बिना अर्थिंग और बिना प्रशिक्षित सुपरविजन के करना सीधा-सीधा मौत को न्योता देना है। “वर्क एट हाइट” के लिए हाइड्रोलिक लिफ्ट और प्रमाणित उपकरण अनिवार्य हैं, लेकिन यहां पुराने, प्रतिबंधित और खतरनाक तरीके अपनाए जा रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित जोखिम है—जहां मजदूरों की जान को सस्ते में तौला जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कोतमा, उमरिया और शहडोल में हाल ही में हुए हादसों ने पहले ही कई परिवारों को उजाड़ दिया है। इसके बावजूद धनपुरी में वही गलती दोहराई जा रही है। क्या प्रशासन को एक और लाश का इंतजार है? क्या हर हादसे के बाद केवल जांच समिति बनाकर फाइल बंद करना ही सिस्टम का तरीका बन चुका है?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा आक्रोश जनता के बीच है। रमजान के पवित्र महीने में, जब लोगों को समय पर बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है—इफ्तार, सहरी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए—तब घंटों बिजली गायब रहती है। घरों में अंधेरा, पानी की किल्लत और गर्मी से बेहाल लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लेकिन इससे भी ज्यादा गुस्सा इस बात का है कि यह समस्या “तकनीकी” नहीं, बल्कि “मिलीभगत” का नतीजा लगती है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका धनपुरी, ठेकेदार और बिजली विभाग के कुछ अधिकारी मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं। काम की गुणवत्ता, सुरक्षा और जनता की सुविधा को नजरअंदाज कर सिर्फ कागजों में सब कुछ सही दिखाया जा रहा है। मौके पर न तो कोई सुरक्षा इंतजाम है, न चेतावनी बोर्ड, न मेडिकल सहायता—और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी नजर आता है।
जनता का गुस्सा अब उबाल पर है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि लोग मजबूर हैं। अगर वे विरोध करते हैं या काम रुकवाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें कानून और प्रशासनिक कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। यही वजह है कि आक्रोश अंदर ही अंदर सुलग रहा है। लेकिन अब लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है—“इस तरह की घोर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
श्रम कानूनों के अनुसार, इस तरह के जोखिमपूर्ण कार्यों में सुरक्षा उपकरण देना, प्रशिक्षित मजदूरों से काम लेना और सभी तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई दुर्घटना होती है, तो ठेकेदार, साइट इंजीनियर और निगरानी अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या इन नियमों की कोई कीमत नहीं बची? या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
रमजान के दौरान बिजली कटौती ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। धार्मिक भावनाओं और आम जरूरतों की अनदेखी कर जिस तरह से बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है, वह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। बिजली विभाग की चुप्पी और नगर पालिका की निष्क्रियता लोगों के शक को और गहरा कर रही है।
अब क्षेत्रीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों ने एकजुट होकर मांग उठाई है—तत्काल संयुक्त निरीक्षण हो, दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई हो, और सुरक्षा उपकरणों के बिना कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही, पहले हुए हादसों में मृत मजदूरों के परिवारों को न्याय और मुआवजा दिया जाए, और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
धनपुरी-बुढार रोड पर चल रहा यह कार्य अब केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सिस्टम की सच्चाई का आईना बन चुका है। यहां हर दिन मजदूर मौत से खेल रहे हैं और जनता अंधेरे में जीने को मजबूर है।
अब देखना यह है—क्या प्रशासन जागेगा, या फिर एक और हादसे के बाद वही घिसी-पिटी संवेदनाएं और खोखले वादे दोहराए जाएंगे?
क्योंकि इस बार सवाल सिर्फ बिजली या काम का नहीं है—यह सवाल है इंसानी जान, जिम्मेदारी और व्यवस्था की असली नीयत का।

इनका कहना है…..

1.ठेकेदार से वर्जन लीजिए ….
सुश्री पूजा बुनकर
मुख्य नगर पालिका अधिकारी
धनपुरी

बिजली कटेगी इसकी सूचना मोबाइल पर पूर्व मे दी गई थी, अब लाइट नही आ रही है तो आप ऊपर बाते कीजिए, ठेकेदार 3बजे से 5बजे तक का समय लिया है

ए.ई. सुभास सेन बुढ़ार

33केवी लाइन काटने का अधिकार हमारे पास नही है आप ए ई साहब से बात कीजिए
अजीत श्रीवास्तव
जे ई विधुत मंडल धनपुरी

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