February 2, 2026

वाह रे राम विशाल! तेरी लीला धनपुरी मे कहीं सूखा, कहीं गीला

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स्वच्छता के भाषण, गंदगी का साम्राज्य; नगर पालिका चैंबर में कैद, शहर संक्रमण के हवाले

शहडोल–धनपुरी।26 जनवरी को धनपुरी नगर में मंचों से गूंजते रहे स्वच्छता के नारे,
क्रिकेट और फुटबॉल के आयोजनों में चमक थी, और हर तरफ़ बैनरों पर लिखा “स्वच्छ धनपुरी।”
लेकिन ज़मीनी हकीकत, जैसे कोई काला आईना, पूरे नगर के सामने बेझिझक खड़ा है।
धनपुरी नगर पालिका, जिसे मध्य प्रदेश की संपन्न नगर पालिकाओं में शुमार किया जाता है,
आज स्वच्छता की सबसे बड़ी विफलता का सजीव प्रमाण बन चुकी है।
स्कूलों के सामने गंदगी, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
नगर के बीचो-बीच स्थित रेड रोज हाई सेकेंडरी स्कूल, टैक्सी स्टैंड और इमामबाड़ा क्षेत्र में पसरी गंदगी


बच्चों के लिए नियमित संक्रमण और बीमारियों का घातक खतरा बन चुकी है।
नर्सरी से लेकर 12वीं तक के बच्चे, रोज़ कीचड़, सड़े पानी और कचरे की बाधाओं को पार कर स्कूल पहुंचते हैं।यह वही जगह है, जहां ज्ञान का मंदिर और संस्कार की ज्योत जलती है,लेकिन नगर पालिका को बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है।
छोटे बच्चे, कोमल मन के साथ, अपने भविष्य की शिक्षा पाने निकले हैं,और रास्ते में संक्रमण, जीवाणु और कीटाणु उनके जीवन को खतरे में डालते हैं।यह सिर्फ शारीरिक खतरा नहीं,बल्कि मनोवैज्ञानिक चोट और भविष्य पर भी असर डालने वाला संकट है।
साफ-सफाई केवल पोस्टर और फाइलों में,
सड़कें गंदगी का समुंदर
गड्डा सड़क, कीचड़ और कचरे का स्थायी डंपिंग ज़ोन बन चुकी है।
नगर की सफाई व्यवस्था कागज़ों में चमकती है, सड़कों पर दम तोड़ती है।
सफाईकर्मी ज़मीनी स्तर पर नहीं दिखते।
हर महीने स्वच्छता बजट कहाँ जाता है? यह सवाल नगरवासी बार-बार उठाते हैं,
लेकिन उत्तर न तो अधिकारी देते हैं और न ही कार्यवाही करते हैं।
वातानुकूलित चैंबरों में बैठे अधिकारी केवल निर्देश जारी करते हैं,
घंटी बजते ही “जी मैडम” की रट और चापलूसी की फौज सजती है।
फोटो खिंचते ही सफाई शुरू,
फोटो हटते ही गंदगी शहर पर भारी।
यही है धनपुरी नगर पालिका की वास्तविकता—सिस्टम केवल दिखावे तक सीमित।


भूमिपूजन और मिठाई, बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कोई नहीं
नगर पालिका में बड़े-बड़े कार्यों के लिए भूमिपूजन, मिठाई वितरण और समारोह आम प्रक्रिया बन चुके हैं।
लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते, स्वच्छ वातावरण और संक्रमण से बचाव के लिए कभी गंभीर कदम नहीं उठाए गए।
संपन्न अधिकारियों के बच्चे महंगे स्कूलों में पढ़ते हैं,
जहां साफ-सुथरा वातावरण, शिक्षण सामग्री और स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित है।
लेकिन धनपुरी के आम बच्चे, जो भविष्य के नागरिक और देश के नागरिक बनेंगे,
उन्हें गंदगी, कीचड़ और बीमारियों के बीच शिक्षा ग्रहण करना मजबूरी बन गई है।
यह फर्क साफ-सुथरे और गंदे शहर के बीच एक कटु सच बयां करता है।
किताबों में बच्चों को भगवान का स्वरूप सिखाया जाता है,
लेकिन नगर पालिका बच्चों के स्वास्थ्य को भगवान से भी कम महत्व देती है।
‘सख्ती’ केवल कहने की, जमीन पर शून्य
जानकार बताते हैं कि जिम्मेदार अधिकारी स्वच्छता को लेकर “बहुत सख्त” हैं।
लेकिन सवाल स्पष्ट हैं—
नगर गंदगी में क्यों डूबा है?
बच्चे संक्रमण और बीमारियों की चपेट में क्यों हैं?
सफाईकर्मी ज़मीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखते?
कहीं फोटो खिंचती है, वहां झाड़ू;
कहीं जनता गुजरती है, वहां भगवान भरोसे।
धनपुरी की सड़कों पर सच्चाई और व्यवस्था का चेहरा नंगा है।
आईना दिखाने का समय आ गया
यह खबर किसी व्यक्तिगत हमला नहीं है।
यह एक निकम्मी और सुस्त व्यवस्था का सार्वजनिक पोस्टमार्टम है।
यदि जिम्मेदार लोग अपनी कुर्सी की गरिमा नहीं निभा सकते,
तो सवाल सीधा है—
पद पर बने रहने का अधिकार किसने दिया?
नगर पालिका अधिकारी अपने एसी चेम्बर से उठकर नगर भ्रमण करें,
सड़कों, गलियों और स्कूलों के सामने की गंदगी का अनुभव करें,
बच्चों और नागरिकों की पीड़ा को महसूस करें।
शहर की वास्तविक तस्वीर केवल कागज़ों और फोटो सेशन से नहीं, बल्कि ज़मीनी निरीक्षण से सामने आएगी।
संक्रमण, बीमारियां और बच्चों का भविष्य खतरे में
गंदगी, कीचड़ और खुले गंदे पानी से त्वचा रोग, वायरल संक्रमण, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा हर रोज बढ़ता है।
छोटे बच्चे, नन्हे कण, अपनी जान जोखिम में डालकर ज्ञान की ज्योत तक पहुँचते हैं।
यह सिर्फ शारीरिक खतरा नहीं,
बल्कि उनके साक्षरता और सामाजिक विकास पर भी असर डालने वाला संकट है।
नगरवासी अब सिर्फ़ भाषण नहीं,
साफ-सुथरी सड़कों, सुरक्षित वातावरण और ठोस जवाब की उम्मीद रखते हैं।
और अगर गंदगी नहीं हटाई गई,
तो निश्चित है कि धनपुरी की सड़कों की बदहाली जन आंदोलन का रूप ले लेगी।
यह समाचार अब सिर्फ़ सूचना नहीं, चेतावनी, आईना और आक्रोश का मिश्रण बन गया है।
नगर पालिका अधिकारी और जिम्मेदार जनता के सामने अपनी असफलता और जिम्मेदारी को स्वीकार करें,
और धनपुरी को केवल बैनरों, भाषणों और फोटोशूट तक सीमित प्रदर्शन नगर न बनने दें।

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