आपसी प्रेम और सौहार्द ही राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी साधना — जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान

क्रिसमस की रोशनी में प्रेम और सौहार्द का काव्यात्मक संगम
इंदौर – क्रिसमस पर्व की आत्मीय गरिमा, प्रेम और भाईचारे के संदेश के साथ आत्मदर्शन द्वारा प्रेरणा सदन, धार रोड, में आयोजित मुशायरा नाइट ने साहित्य, संस्कृति और आध्यात्म का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।
“हम चमकना चाहते हैं, देर तक” थीम पर सजी इस विशेष संध्या में शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, सद्भाव, एकता और मानवीय संवेदनाओं की सुगंध बिखेरी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश माननीय हिदायत उल्ला खान की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि
“प्रेम वह शक्ति है, जो समाज की दूरियों को मिटाकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है और देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाती है।”
उन्होंने शायरों से आह्वान किया कि वे अपनी कविताओं और ग़ज़लों के माध्यम से प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक सशक्त और एकजुट भारत के निर्माण का संदेश समाज तक पहुँचाएँ।
क्रिसमस पर्व के पावन अवसर पर माननीय जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने अपने स्वरचित गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति भी दी। उनके गीत में प्रेम, शांति, करुणा, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की भावनाएँ इतनी प्रभावशाली थीं कि श्रोता भावविभोर हो उठे और तालियों से सभागार गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत में श्री पुरुषोत्तम धाकड़ ने उभरते शायरों का स्वागत एवं सम्मान करते हुए साहित्यिक प्रतिभाओं को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की मेजबानी आत्मदर्शन टीवी के सीईओ फादर आनंद ने की। उन्होंने सभी शायरों, ग़ज़लकारों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं।
मुशायरे का कुशल एवं सधा हुआ संचालन श्री सचिन राव ‘विराट’ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में शायर श्री धीरज चौहान, श्री शाहनवाज अंसारी, श्री महेंद्र सिंह पवार, श्री राहुल शर्मा उर्फ़ राहिल, श्री यश शुक्ला, श्री शौरभ, श्री नदीम एवं श्री अंश ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से फादर प्रीतम, पंकज नागर, रामस्वरूप, ईशायू एवं आयुषी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समापन अवसर पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि
क्रिसमस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानवता को अपनाने का संकल्प है, और जब साहित्य इसमें अपनी आवाज़ मिलाता है, तो समाज को सकारात्मक दिशा और राष्ट्र को एकता की मजबूती मिलती है।
यह आयोजन प्रेम, सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र विकास के संकल्प के साथ स्मरणीय बन गया।