कड़ाके की ठंड में करुणा की गरमाहट: नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी सरावगी और सिंधी समाज की महिलाओं ने बच्चों को बांटे गर्म मोज़े–चप्पल

बुढ़ार।कड़ाके की सर्दी के बीच जब आम जनजीवन ठिठुरन से जूझ रहा है, ऐसे समय में मानव सेवा ही ईश्वर सेवा के शाश्वत सिद्धांत को साकार करती हुई एक मार्मिक और प्रेरणादायी पहल बुढ़ार नगर में देखने को मिली। नगर परिषद बुढ़ार की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी सरावगी के नेतृत्व में सिंधी समाज की समाजसेवी महिलाओं ने अतरिया टोला, वार्ड क्रमांक–6 पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों के बीच गर्म मोज़े और चप्पल वितरित किए, जिससे नन्हे कदमों को सर्दी से सुरक्षा मिल सके।
इस सेवा कार्य में वार्ड पार्षद हरिश्चंद्र केवट के साथ सिंधी समाज की प्रतिष्ठित महिलाएं लता ज़यु, उषा दोड़वानी एवं कंचन मनवानी भी मौजूद रहीं। सभी ने बच्चों के साथ समय बिताया, उनके कोमल मन में उठ रहे सवालों के सरल उत्तर दिए और उन्हें ठंड से बचाव व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान और आंखों में चमक इस मानवीय प्रयास की सार्थकता को स्वयं बयान कर रही थी।
इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती शालिनी सरावगी ने भावुक शब्दों में कहा कि “बच्चे ईश्वर का साक्षात रूप होते हैं। उनके हृदय में न कोई भेदभाव होता है, न कोई स्वार्थ—वे केवल प्रेम को पहचानते हैं। कड़ाके की ठंड में भी ये नन्हे मासूम दिनभर खेलते रहते हैं, उन्हें न सर्दी का एहसास होता है और न ही कठिनाइयों का। ऐसे में समाज का यह दायित्व है कि हम उनकी छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल रखें और उनके जीवन में खुशियों की गरमाहट भरें।”
उन्होंने आगे कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता केवल दान नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का प्रतीक है। इस पहल से न केवल बच्चों को राहत मिली, बल्कि समाज को यह संदेश भी मिला कि सेवा, सहयोग और करुणा से ही एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।
यह आयोजन निःसंदेह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनकर सामने आया है, जहां ठंड के बीच इंसानियत की आग ने कई मासूम चेहरों को मुस्कुराने का अवसर दिया।