अवैध रिश्ते, नशा और हैवानियत: 7 साल के मासूम की हत्या ने झकझोरा धनपुरी, आरोपी गिरफ्तार

इंट्रो
कभी हँसी-खुशी से गूंजने वाला घर जब अचानक खामोशी में डूब जाए, तो यह केवल एक परिवार का दुख नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की विफलता बन जाता है। धनपुरी में सात साल के मासूम बच्चे की हत्या ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं हम नशे, अनियंत्रित रिश्तों और नैतिक लापरवाही को चुपचाप स्वीकार तो नहीं कर रहे। यह घटना किसी एक व्यक्ति का अपराध भर नहीं, बल्कि उस सामाजिक कमजोरी का परिणाम है, जहां समय रहते चेतना और जिम्मेदारी नहीं दिखाई गई। अब ज़रूरत है संवेदना के साथ आत्ममंथन की—ताकि अगला बचपन इस अंधेरे की भेंट न चढ़े।
धनपुरी (शहडोल)।धनपुरी की शांत छवि पर एक बार फिर अपराध का गहरा साया पड़ गया है। सात साल के मासूम बालक की अपहरण के बाद निर्मम हत्या ने न केवल पुलिस प्रशासन को झकझोरा है, बल्कि पूरे समाज के सामने भयावह सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या बढ़ता नशा और अवैध संबंध समाज को इस हद तक खोखला कर चुके हैं कि अब मासूम भी सुरक्षित नहीं रहे?
घटना की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब फरियादिया श्रीमती नंदनी कोल ने थाना धनपुरी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका 7 वर्षीय नाबालिग पुत्र घर से लापता हो गया है। रिपोर्ट के आधार पर थाना धनपुरी में अपराध क्रमांक 26/2026 धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर खोजबीन तेज की, आसपास के लोगों से पूछताछ की गई और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।
31 जनवरी 2026 को अपहृत बालक का शव बैगा ओसीएम बगड्या नाला में मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। विवेचना के दौरान पुलिस को अहम सूचना मिली कि 27 जनवरी को एक युवक को उसी नाले की ओर जाते हुए देखा गया था। संदेह के आधार पर पुलिस ने वार्ड नंबर 20, बड़ी मस्जिद के पास निवासी मो. मोहसिन, पिता मो. मोईनुद्दीन, उम्र 25 वर्ष को अभिरक्षा में लेकर सख्ती और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की।
पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसका अपहृत बालक की मां नंदनी कोल से करीब ढाई साल से अवैध प्रेम संबंध था। वह शादी करना चाहता था, लेकिन कुछ दिनों से बातचीत बंद होने पर वह गुस्से और नशे की हालत में आपा खो बैठा। इसी सनक में उसने मासूम बच्चे को अपने साथ ले जाकर बैगा ओसीएम बगड्या नाला के पास गला दबाकर हत्या कर दी और सबूत छिपाने के इरादे से शव को नाले में फेंककर फरार हो गया।

पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध धारा 103(1), 238(A) बीएनएस तथा 3(2)(V) एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। आरोपी को 3 फरवरी 2026 को माननीय न्यायालय में पेश किया गया।
यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही उस सड़ांध का आईना है, जिसमें नशा, अवैध संबंध और नैतिक पतन खुलकर सामने आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर इन हालात का जिम्मेदार कौन है—परिवार, समाज या व्यवस्था? क्या नशे के खुले कारोबार और सामाजिक अनदेखी ने युवाओं को अपराध की राह पर धकेल दिया है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाज और प्रशासन ने युवाओं को नशे से दूर रखने और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए होते, तो शायद एक मासूम की जान बच सकती थी।
पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शहडोल के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशन एवं एसडीओपी धनपुरी के नेतृत्व में की गई। इस जघन्य अपराध के खुलासे में निरीक्षक खेलसिंह पन्द्रे, उप निरीक्षक नागेंद्र प्रताप सिंह, आर.पी. प्रजापति, दीपक तिवारी, निरंकार सिंह, रमणाथ, शैलेन्द्र, अजय सिंह सहित पुलिस बल की अहम भूमिका रही।
मासूम की हत्या ने धनपुरी ही नहीं, पूरे समाज को चेतावनी दी है—यदि अब भी नशे और अवैध रिश्तों पर लगाम नहीं लगी, तो ऐसी घटनाएं फिर दोहराई जा सकती हैं। अब सवाल यह नहीं कि अपराध क्यों हुआ, सवाल यह है कि अगला शिकार कौन होगा?