February 3, 2026

नगर परिषद् अध्यक्ष अपने चहेतों को ठेका देने की चाहत में, कभी टेंडर निरस्त कर तो कभी नियम शर्तो में बदलाव कर खेला जा रहा है खेल

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बरगवां अमलाई नगर परिषद् में वित्तीय अनियमितताओं का बोलबाला 19 % काम दर वाली निविदा को निरस्त कर 5% अधिक दर में पास करने की तैयारी

अनूपपुर।भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की प्रदेश सरकार की कोशिशें नेता और अफसरों की फाइलों से आगे नहीं बढ़ती हैं। जिले की नवगठित नगर पंचायत जोकि पंचायत काल से ही विवादों में रहने के कारण आज नगर परिषद का रूप ले चुकी है। लेकिन फिर भी बंदरबांट का तरीका पंचायत स्तर का ही मालूम पड़ता है। जी हां विकास के नाम पर जीरो का आलम आज भी तैयार है और बमुश्किल एक टेंडर पास हुआ है उस पर भी तरह-तरह के सवाल देखने को मिल रहे हैं अब खबर है कि नगर परिषद के अध्यक्ष और सीएमओ ने मिलकर विभिन्न रोड का टेंडर निकाला था, जिसमे लोवेस्ट रेट टेंडर 19 परसेंट बिलो था ,ज्ञात हो कि पहले ही टेंडर में तीन फर्मों के द्वारा टेंडर डाला था। जिसमें पहला टेंडर 19 परसेंट कम वही दूसरा टेंडर 11 और तीसरा टेंडर 8% कम पर डाला गया था, और सामान्य सी बात है 19 परसेंट बिलो डालने वाले ठेकेदार को काम मिल भी गया था लेकिन उसने काम नहीं किया उसके बाद परिषद के द्वारा उसी टेंडर को बिना किसी कारण के रिकॉल किया गया जिसमें मात्र दो ही टेंडर आया और दोनों टेंडर 4% एवं 5% अधिक में पाए गए। जिसे परिषद के जिम्मेदार अध्यक्ष के द्वारा उक्त टेंडर को पास करने का मन बना लिया ,यह अपने आप में अनोखा मामला है। जिसके पहले ही टेंडर में 19% तक कम में काम करने वाले तीन टेंडर आए तो 5% बढ़कर शासन के रुपयों का दुरुपयोग करने का अध्यक्ष महोदय को कोई हक नहीं बनता है उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि तीसरा टेंडर, चौथा टेंडर, पांचवा टेंडर बुलाने चाहिए ताकि कम से कम काम हो सके, वही दूसरी निविदा मन पावर सप्लाई की थी जिस्मे प्रथम कॉल में प्री क्वालिफिकेशन लगाए जाने के बाबजूद कई फर्मो में रूचि दिखाई थी लेकिन उस निविदा को निरस्त कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष द्वारा निविदा में प्री क्वालिफिकेशन की शर्तों को हटा निविदा बुलाई गई एवं परिषद् के करीबी लोगो से निविदा डलवाई गई। शासन के राशियों का दुरुपयोग करने के लिए और मोटी कमीशन सेट करते हुए टेंडर दाताओं को लाभ देकर जिस तरह से होली खेलने का मन बना कर अध्यक्ष और उनके भतीजे विधायक प्रतिनिधि रामू के द्वारा जो षड्यंत्र रचा गया है, वह अब शासन प्रशासन और जनता के सामने स्पष्ट हो रहा है जबकि किसी टेंडर को बढ़कर देने का नियम ही कुछ अलग है लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ा कर सिर्फ अपनी जेब भरने के लिए शासन के रुपयों की जमकर होली खेली जा रही है।

कमीशन के खातिर शासकीय रुपयों का दुरुपयोग

हमेशा विवादों में घिरी रहने वाली बरगवा नगर परिषद एक बार फिर से भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियां बटोर रही हैं। खबर है कि अध्यक्ष के भतीजे(रामु) का पूरा परिवार शासन की योजनाओं को खेलने में माहिर है, और फर्श से अर्श तक का कहानी पूरे खानदान की है किस तरह से शासन के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर गुडविल में शासन की राशियों बंदरबांट करना है उनके लिए यह कोई नई बात नहीं है। अब एक बार फिर से करोड़ों रुपए के टेंडर रोड बनाने के नाम पर खर्च करने की योजना बना चुके हैं और करोड़ों के काम में लगभग 20% क्रम में होने वाले काम को अब 5% की बढ़ोतरी करके ठेकेदारों के साथ मिलकर शासकीय राशि को दुरुपयोग करने का पूरा षड्यंत्र रच चुके हैं। खबर है कि पूरे परिषद में अध्यक्षा की कुछ भी नहीं चलती है और पूरा का पूरा काम विधायक प्रतिनिधि भतीजा ही देखता है जो अपने मर्जी से जिन वार्डों में उनके लोग हैं वहां पर दिखावे की काम करना है, और जिन वार्ड में नहीं करना है वहां पहले से ही आंखें बंद करके बैठे हैं। इस तरह से एक विधायक प्रतिनिधि को पूरा का पूरा परिषद शॉप कर अध्यक्ष सिर्फ कमीशन के खातिर चुप बैठे हैं जबकि महिला अध्यक्ष होने के कारण एक बार अध्यक्ष का पति समय-समय पर उनके साथ जाकर काम देख सकता है लेकिन भतीजा किसी कीमत पर किसी भी कार्य में दखल नहीं दे सकता है ना वह जनता का चुना हुआ व्यक्ति है और ना ही योग्य ।काला धन के बल पर राजनैतिक रसुख बनाकर शासन के रुपयों को दुरुपयोग करने पर आमादा है।

क्या कहता है नियम

जी हां नियमों की बात करें तो जिस तरह से नगर परिषद में करोड़ों रुपए के काम के लिए तीन टेंडर आए थे तीनों ही टेंडर कम में डाले गए थे और अब दूसरे ही टेंडर में 5% की बढ़ोतरी करके कार्य को नहीं दिया जा सकता। इसके लिए बकायदा परिषद को छठवीं, सातवीं, आठवीं काल तक इंतजार करना होता है ।लेकिन दूसरी टेंडर में ही बढ़ोतरी नहीं कर सकते जब टेंडर कम में करने के लिए 3 ठेकेदार पहले ही तैयार थे तो उन्हें तीसरा और चौथा टेंडर भी बुलाना चाहिए, ताकि शासन के रुपयों के साथ-साथ जनता की मेहनत की कमाई को बचाया जा सके ताकि विभिन्न कार्यों पर अन्य विकास कार्य कराए जा सके। नियम के अनुसार जब टेंडर को बढ़ाकर दीया जाना होता है तो परिषद के द्वारा निर्माण स्थल से मटेरियल की दूरी, मशीन रूपी कार्यों का हवाला, निर्माण सामग्री के साथ-साथ अन्य प्रकार के विभिन्न बिंदुओं को परिषद के द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि किन कारणों से उक्त टेंडर जो कि पहले 20 प्रतिशत कम में होने वाले थे अब उन टेंडरों को किन कारणों से 5% बढ़ाकर दिया जा रहा है यह कारण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए लेकिन यहां पर नियमों की अनदेखी की गई है।

टेंडर होना चाहिए निरस्त

जिस तरह से करोड़ों के कार्य पर 20% की कम में आने वाली टेंडर को अचानक दूसरे ही टेंडर में 5% बढ़ कर दिया जाना अपने आप में लाखों का भ्रष्टाचार स्पष्ट प्रतीत हो रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि परिषद के जिम्मेदार अध्यक्ष और सीएमओ की मिलीभगत के द्वारा ही यह कार्य पूर्ण होते हुए दिख रहा है। जिस पर परिषद के जिम्मेदार समस्त पार्षदों की सहमति और असहमति लेकर चर्चा होने के बाद ही टेंडर को पास करना चाहिए, नाम न छापने की शर्त पर कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें तो टेंडर की कोई जानकारी ही नहीं है और ना किसी प्रकार की उनसे चर्चा की जा रही है अगर खुलकर पार्षद विरोध करते हैं तो अध्यक्ष के भतीजे के द्वारा उनके वार्ड पर किसी प्रकार का काम नहीं होने की धमकी भी दी जाती है इसलिए पार्षद भी कुछ नहीं कह पा रहे हैं। लेकिन जिले और संभाग में बैठे आला अधिकारी तो नियम कायदे कानून को जानते हैं वही शहडोल में बैठे अधिकारी , इंजीनियर बखूबी इस भ्रष्टाचार को कागजों में देख कर ही समझ सकते हैं, कि यह नियम के विपरीत है या सही। सिर्फ कमीशन के बल पर शासन के राशियों का इस तरह दुरुपयोग करना जिम्मेदार पदों में बैठे लोगों को शोभा नहीं देता है इसके लिए बाकायदा सातवीं आठवीं कॉल होनी चाहिए । इसके अलावा विभिन्न ठेकेदारों और फलों के विशेष व्यक्तियों से बात करने पर बताया गया कि परिषद के द्वारा प्रचार-प्रसार की भारी कमी की गई है जिस कारण से टेंडर का पता नहीं चल पाया है दैनिक अखबारों में कम से कम 2 से 3 राष्ट्रीय अखबारों में विशेष रूप से विज्ञापन की प्रतियां छपनी चाहिए लेकिन उसमें भी बचत करने के इरादे से परिषद के अध्यक्ष ने मात्र अपने चहेते एक अखबार में विज्ञापन निकालकर यह खेल खेला है। नियमों का पालन उक्त टेंडर पर नहीं होने की दशा में उच्च अधिकारियों को स्वत संज्ञान लेकर उक्त टेंडर को निरस्त करने के आदेश भी जारी करने चाहिए ताकि शासकीय राशि की सुरक्षा भी हो सके।

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