काले हीरे की चमक से पूरे देश को रोशन करने वालों को वेतन के पड़े लाले!

SECL सोहागपुर के रामपुर बटुरा OCM में जय अंबे कंपनी पर गंभीर आरोप, लग भग450 से काम कराने का दावा, और करीब 185 की हाजरी दिखाने की शिकायत
धनपुरी/शहडोल। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया कीग अनुषांगिक इकाई SECL के सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत रामपुर बटुरा OCM में ठेका श्रमिकों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां कार्यरत ठेका कंपनी मैसर्स जय अंबे पर श्रमिकों के शोषण, समय पर वेतन भुगतान नहीं करने तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने के आरोप मजदूरों द्वारा लगाए गए हैं। कड़ी मेहनत कर काले हीरे यानी कोयले की चमक से पूरे देश को रोशन करने वाले मजदूरों को ही अपनी मेहनत की कमाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
सुरक्षा भगवान भरोसे, BTC और PME को लेकर सवाल
खदान सूत्रों और पीड़ित श्रमिकों के अनुसार कंपनी में कार्यरत कई श्रमिकों के BTC (वोकेशनल ट्रेनिंग) और PME (पीरियॉडिकल मेडिकल एग्जामिनेशन) को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। मजदूरों का आरोप है कि आवश्यक प्रशिक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना भी श्रमिकों को खदान के जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा है।
रामपुर बटुरा OCM में डंपर, डोजर, ग्रेडर, PC जैसी भारी मशीनरी के बीच मजदूर काम करते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण और मेडिकल फिटनेस सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रमिकों ने मांग की है कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि खदान में काम करने वाले सभी श्रमिकों को निर्धारित प्रशिक्षण और मेडिकल परीक्षण की सुविधा मिली है या नहीं।

HPC पे-स्केल और VDA को लेकर भी नाराजगी
श्रमिकों ने वेतन भुगतान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि ठेका श्रमिकों के लिए निर्धारित HPC पे-स्केल के अनुसार भुगतान नहीं हो रहा है। VDA और अन्य देय राशि को लेकर भी पारदर्शिता नहीं होने की शिकायत है।
श्रमिकों के अनुसार इससे पहले इसी खदान में कार्यरत डोलू कंपनी के समय वेतन व्यवस्था बेहतर थी। उनका दावा है कि उस दौरान HPC के अनुसार वेतन, निर्धारित VDA, महंगाई भत्ता, वेज स्लिप, बोनस और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं नियमित रूप से मिलती थीं।
वर्तमान कंपनी पर आरोप है कि मजदूरों को निर्धारित वेतन से कम भुगतान किया जा रहा है तथा VDA की राशि का भी पूरा लाभ नहीं मिल रहा। कई श्रमिकों को वेतन पर्ची नहीं दिए जाने की शिकायत भी सामने आई है।
2-3 महीने तक पेमेंट रोकने का आरोप
श्रमिकों की सबसे बड़ी परेशानी समय पर वेतन नहीं मिलने को लेकर है। मजदूरों का आरोप है कि कई बार दो से तीन महीने तक पेमेंट रोक दिया जाता है। इससे मजदूरों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो जाता है।
बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस, घर में शादी-विवाह, बीमारी में इलाज और बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों जैसी जरूरतों के लिए मजदूरों को अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए ठेकेदार के चक्कर लगाने पड़ते हैं। श्रमिकों का कहना है कि दिन-रात खदान में काम करने के बाद भी यदि समय पर वेतन न मिले तो परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
450 मजदूरों से काम, 185 की हाजरी का दावा
हाजरी को लेकर भी श्रमिकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मजदूरों का दावा है कि रामपुर बटुरा OCM में करीब 450 श्रमिक काम कर रहे हैं, जबकि कंपनी द्वारा SECL में जमा किए जाने वाले MTK और मस्टर रोल में केवल 185 श्रमिकों की हाजरी दर्शाई जा रही है।
मजदूरों का सवाल है कि यदि मौके पर करीब 450 लोग कार्य कर रहे हैं तो शेष श्रमिकों की हाजरी कहां दर्ज हो रही है? उनके PF, ESI, बोनस और ओवरटाइम सहित अन्य वैधानिक अधिकारों का क्या हो रहा है? श्रमिकों ने मांग की है कि वास्तविक श्रमिक संख्या और कंपनी के दस्तावेजों का मिलान कराया जाए।
पेमेंट के लिए मशीनें खड़ी, काम बंद करने को मजबूर
श्रमिकों का कहना है कि जब लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलता तो आक्रोशित मजदूर OB डंपर, डोजर, ग्रेडर और OB लोडिंग में लगी PC मशीनों को खड़ा कर काम बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में कंपनी प्रबंधन द्वारा बातचीत कर मजदूरों को मनाया जाता है और काम दोबारा शुरू होता है, लेकिन कुछ समय बाद भुगतान में देरी की समस्या फिर सामने आ जाती है।
जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
श्रमिकों और मजदूर संगठनों ने SECL सोहागपुर के महाप्रबंधक तथा जिला श्रम विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मांग है कि सभी कार्यरत मजदूरों की वास्तविक हाजरी की जांच हो, लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए, PF-ESI रिकॉर्ड की जांच की जाए, BTC और PME की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा HPC पे-स्केल के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो रामपुर बटुरा OCM गेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मजदूरों का कहना है कि वे इदेश के लिए काला हीरा निकालकर रोशनी पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि “काले हीरे की चमक से पूरे देश को रोशन करने वालों को ही अपने वेतन के लिए लाले पड़े हैं।”