जमुई के जंगल में ‘52 पत्ती’ का हाईटेक खेल! भूपेंद्र सिंह, मार्तण्ड सिंह और पिंटू शुक्ला के नाम चर्चा में

दोपहर 3 बजे से देर रात तक सजती है लाखों की जुआ महफिल, शहडोल से छत्तीसगढ़ तक पहुंच रहे खिलाड़ी; पुलिस संरक्षण के आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल

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जमुई के जंगल में ‘52 पत्ती’ का साम्राज्य, लाखों का खेल और पुलिस की खामोशी!
शहडोल। शहर से दूर जमुई के जंगल में इन दिनों कथित तौर पर लाखों के दांव पर ‘52 पत्ती’ का हाईटेक खेल बेखौफ चलने की चर्चा है। दोपहर 3 बजे से देर रात तक सजने वाली इस महफिल में शहडोल से लेकर कटनी, उमरिया, अनूपपुर और छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-बैकुंठपुर तक के जुआरियों के पहुंचने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक भूपेंद्र सिंह, मार्तण्ड सिंह और पिंटू शुक्ला के नाम इस खेल से जुड़े होने की चर्चा है। सबसे बड़ा सवाल—इतने बड़े कथित जुआ फड़ की भनक पुलिस को कैसे नहीं?
✍️अतीक खान 7000934139
शहडोल। जिले की सीमाओं से दूर जमुई के जंगल इन दिनों कथित तौर पर लाखों रुपये के हाईटेक जुए के अड्डे में तब्दील होने की चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार यहां दोपहर करीब 3 बजे से देर रात तक जुए की महफिल सजती है। इस कथित फड़ पर शहडोल, बुढ़ार, धनपुरी, अनूपपुर, उमरिया, पाली, नौरोजाबाद, शाहपुरा और कटनी सहित कई इलाकों के जुआरियों के अलावा छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ और बैकुंठपुर क्षेत्र से भी लोग पहुंचने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल में भूपेंद्र सिंह, मार्तण्ड सिंह और पिंटू शुक्ला के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि सामान्य जुए के बजाय यहां तकनीक और निगरानी के सहारे ऐसा इंतजाम किया जाता है कि बाहरी व्यक्ति आसानी से फड़ तक नहीं पहुंच सके।
रास्तों पर ‘निगरानी तंत्र’, अंदर बेखौफ चलता खेल!
जानकार सूत्रों के अनुसार कथित जुआ फड़ तक पहुंचने वाले रास्तों पर मोबाइल फोन लेकर लोग तैनात रहते हैं। किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध गतिविधि की भनक लगते ही कथित तौर पर इसकी सूचना आगे पहुंचा दी जाती है। इसी वजह से पुलिस की कार्यवाही से पहले ही फड़ खाली होने की चर्चा है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अवैध गतिविधि संचालित करने वालों तक पुलिस की कार्रवाई की सूचना कैसे पहुंचती है?
सोहागपुर पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर आरोप सोहागपुर थाना पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का आरोप है कि थाना स्तर पर कथित रूप से जुआ खेलने की खुली छूट दी जा रही है। हालांकि पुलिस की संलिप्तता अथवा संरक्षण का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सवाल यह भी है कि यदि जमुई के जंगल में लंबे समय से लाखों का जुआ चल रहा है और अलग-अलग जिलों से लोग वहां पहुंच रहे हैं, तो स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? या फिर भनक होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
एसपी की निगाह से कब तक दूर रहेगा ‘जुए का साम्राज्य’?
जुआ सामाजिक अपराधों को बढ़ावा देने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। ऐसे में यदि जमुई में वास्तव में इतना बड़ा जुआ फड़ संचालित हो रहा है, तो यह केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल है।
अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या जमुई के जंगल में चल रहे कथित हाईटेक जुए के खेल पर शिकंजा कसेगा? क्या पुलिस संरक्षण के आरोपों की जांच होगी? या फिर ‘52 पत्ती’ की यह महफिल इसी तरह बेखौफ सजती रहेगी—यह आने वाला समय बताएगा।
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