इल्म, इरादे और इंक़िलाब की नई दास्तान — एक रौशन मुस्तक़बिल की तरफ़ बढ़ता क़दम

कटनी।“अल्लाह के नाम से, जो सबसे ज़्यादा रहम करने वाला, सबसे ज़्यादा मेहरबान है। ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।”
इन्हीं पाक अल्फ़ाज़ के साथ एक ऐसे अज़ीम ख़्वाब ने आकार लेना शुरू किया है, जो आने वाली नस्लों की सोच, तालीम और तक़दीर बदलने का मंसूबा रखता है। यह महज़ एक तालीमी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक तहज़ीबी, तालीमी और रूहानी तहरीक है, जिसका मक़सद इंसान को इल्म, अख़लाक़ और किरदार की ऊँचाइयों तक पहुँचाना है।
आज जब तालीम महज़ किताबों तक सीमित होकर रह गई है और बच्चों का ज़ेहन दबाव, प्रतिस्पर्धा और असुरक्षा के साये में पल रहा है, ऐसे वक़्त में नॉलेज एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी, कटनी की यह पहल एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। यह तहरीक इस यक़ीन पर खड़ी है कि तालीम सिर्फ़ डिग्री हासिल करने का नाम नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर इंसान बनाने की ज़िम्मेदारी भी है।
इस प्रस्तावित शिक्षण परिसर की कल्पना ही अपने आप में एक मुकम्मल दुनिया की तस्वीर पेश करती है—जहाँ हरियाली होगी, खुला आसमान होगा, दिलों को सुकून देने वाला माहौल होगा, और बच्चों के ज़ेहन में इल्म के चिराग़ रोशन होंगे। यहाँ प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक की आधुनिक शिक्षा, इंग्लिश मीडियम व्यवस्था, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, उर्दू और अरबी की तालीम, दीनी तरबियत, सुरक्षित आवासीय व्यवस्था, लाइब्रेरी, मस्जिद, प्लेग्राउंड, स्टाफ़ रूम और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक मुकम्मल एजुकेशनल कैंपस विकसित किया जाएगा।
इस मुहिम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल इमारतें खड़ी करने का सपना नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार नस्ल तैयार करने का संकल्प है। आज के दौर में जब बच्चों की ज़िंदगी सिर्फ़ अंकों और रैंकिंग के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है, ऐसे में यह संस्थान उन्हें बेहतर माहौल, बेहतर सोच और बेहतर दिशा देने का संकल्प ले रहा है।
अल्हम्दुलिल्लाह, इस नेक इरादे की बुनियाद भी मज़बूती से रखी जा चुकी है। 22 सितंबर 2025 को एक एकड़ ज़मीन की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है और 26 सितंबर 2025 को दो एकड़ ज़मीन के लिए एग्रीमेंट संपन्न हुआ है। इसके साथ ही “नॉलेज एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी” विधिवत पंजीकृत होकर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
यह पहल सिर्फ़ चंद लोगों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की ज़िम्मेदारी है। यह वक़्त है दरियादिली, कुर्बानी और खिदमत का। यह वक़्त है कि हम अपने इल्म, माल और वक़्त में से कुछ हिस्सा आने वाली नस्लों के नाम करें। क्योंकि जो कुछ हमारे पास है, वह सब अल्लाह की अमानत है, और वही देखना चाहता है कि हम उस अमानत को कैसे खर्च करते हैं।
इस नेक क़दम के रहनुमा सैय्यद हफ़ीज़-उर-रहमान क़ादरी का पैग़ाम साफ़ है—रास्ता मुश्किल हो सकता है, रुकावटें आएँगी, हौसला तोड़ने वाली ताक़तें सामने आएँगी, लेकिन जिसने अल्लाह पर भरोसा कर लिया, उसकी मंज़िल कभी दूर नहीं होती। नबियों के रास्ते भी आसान नहीं थे, मगर आख़िरकार कामयाबी उन्हीं के क़दम चूमती है जो सब्र, यक़ीन और अमल के साथ आगे बढ़ते हैं।
आज ज़रूरत है कि समाज का हर जागरूक शख़्स इस कारवां का हिस्सा बने। यह महज़ एक तालीमी इदारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान, तहज़ीब और भविष्य गढ़ने की एक मुकम्मल कोशिश है।
इल्म की इस रोशनी को फैलाने के लिए आगे आइए — क्योंकि क़लम उठेगी, तो तक़दीर बदलेगी।