February 3, 2026

पुलिस को शक, जामिया का फर्जी आई-कार्ड लेकर घुसे थे शरारती तत्व

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नई दिल्ली

पुलिस को शक है कि जामिया के आई कार्ड बनवाकर कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में शामिल हुए थे। असली स्टूडेंट्स से कहीं अधिक हिंसा भड़काने में फर्जी छात्रों का हाथ था। हिरासत में लिए गए ऐसे 51 स्टूडेंट्स की पुलिस ने जांच करानी शुरू कर दी है। इनमें से 36 को कालकाजी से और 15 को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके से हिरासत में लिया गया था। ये सभी खुद को जामिया, डीयू के हिंदू कॉलेज और इग्नू के स्टूडेंट होने का दावा कर रहे थे। पुलिस को इनमें से कुछ पर शक है कि उन्होंने जामिया के फर्जी आई कार्ड बनवा रखे थे। दूसरी तरफ रविवार को हुई इस घटना को पुलिसिया खुफिया तंत्र के फेल होने के रूप में भी देखा जा रहा है।
 
दिल्ली पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि रविवार को हुई हिंसा में रात तक 51 ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन पर शक है। ये सभी खुद को तीन अलग-अलग यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट बता रहे थे। इनमें से अधिकतर जामिया का होने का दावा कर रहे थे। पुलिस को शक है कि इनमें से कुछ शरारती तत्व थे। सभी के आई कार्ड और उनकी पहचान की दूसरी डिटेल लेकर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। अब पुलिस इन सभी की जांच करा रही है कि कौन असली था और कौन नकली। पुलिस ने यह भी बताया कि हिरासत में लिए गए 51 छात्रों में से एक ने अपने आप को 17 साल का बताया था। उसे तभी पैरंट्स को बुलाकर उनके हवाले कर दिया गया था। एक लड़की भी थी, जिसे तुरंत छोड़ दिया गया था।

पुलिस प्रवक्ता एम. एस. रंधावा का कहना है कि जामिया स्टूडेंट्स को डरने की जरूरत नहीं है। पुलिस कैंपस में नहीं घुसेगी। हां, कैंपस में अगर कोई शरारती तत्व घुसता है, तो उसकी रोकथाम के लिए जरूर पुलिस जांच कर सकती है। पुलिस ने बताया कि रविवार रात को आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वालों में एक लड़की भी शामिल थी। उस लड़की के पिट्ठू बैग में पत्थर ही पत्थर थे। पुलिस ने पत्थर भरने का कारण पूछा तो लड़की ने विमन सेफ्टी का जवाब दिया। पुलिस ने उसे जाने दिया।

जामिया हिंसा पर मोदी ने ट्वीट कर दिया संदेश
जामिया में रविवार को हुई इस हिंसा को पुलिसिया खुफिया तंत्र के फेल होने के रूप में भी देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जामिया में विरोध प्रदर्शन शुक्रवार से ही शुरू हो गया था। रविवार को दिन में कुछ नेताओं ने सभाएं की थीं। फिर भी पुलिस इस बात को क्यों नहीं भांप पाई कि इलाके में हिंसा भड़क सकती है। रविवार रात साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने हिंसा के पीछे साजिश की बात भी कही थी। पुलिस पहले इस बात को क्यों नहीं समझ पाई? प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने में भी पुलिस उतनी तत्पर दिखाई नहीं दी, जितनी कि आमतौर पर होती है। ऐसा लग रहा था कि पुलिस ने कुछ ढिलाई दे दी है। हिंसा भड़कने पर बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने अपने खुफिया तंत्र के फेल होने से इनकार किया है।

पुलिस का कहना है कि जिस-जिस ने भी ट्वीट करके या विडियो वायरल करके इस पूरे घटनाक्रम में अफवाहें फैलाई हैं उन सभी की जांच कराई जाएगी। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
 

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