February 3, 2026

नागरिकता संशोधन विधेयक को कोर्ट में चुनौती देगी कांग्रेस

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नई दिल्ली 
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन विधेयक के पास होने के बाद अब इसे कानून में तब्दील होने में केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत है। कांग्रेस ने कहा है कि इस विधेयक को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि निकट भविष्य में कोर्ट में इस विधेयक को चैलेंज किया जाएगा। बता दें कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कांग्रेस ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि इस बिल के जरिए मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक का भारत के मुसलमानों से कोई लेनादेना नहीं है और किसी को भी देश में डरने की जरूरत नहीं है। 

सोनिया गांधी ने बताया काला दिन
राज्यसभा में विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे काला दिन करार दिया है। वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना के सांसदों ने राज्यसभा में वोटिंग में भाग नहीं लिया। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि शरणार्थियों को नागरिकता दी जानी ठीक है लेकिन उन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। राज्यसभा में बिल के बिरोध में बात रखते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि इस बिल से अन्य पड़ोसी देशों को बाहर क्यों रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि मुसलमानों पर भी अफगानिस्तान में अत्याचार होता रहा है फिर उन्हें भी नागरिकता क्यों नहीं दी जानी चाहिए। 

पीएम मोदी ने कहा-ऐतिहासिक दिन 
बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट करके खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह भारत की दया और करुणा के साथ भाईचारे के लिए ऐतिहासिक दिन है। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि इस विधेयक के जरिए वर्षों से प्रताड़ित होते आ रहे लोगों को न्याय मिलेगा। गौरतलब है कि सदन में गृह मंत्री ने कहा था कि मुसलमान पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक नहीं हैं इसलिए उनके उत्पीड़न की आशंकाएं कम हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में 6 धर्मों को शामिल किया गया लेकिन कांग्रेस केवल मुसलमानों पर ही क्यों फोकस कर रही है? 

नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या? 
नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत 1955 के सिटिजनशिप ऐक्ट में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत में बसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इन समुदायों के उन लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जो बीते एक साल से लेकर 6 साल तक में भारत आकर बसे हैं। फिलहाल भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए यह अवधि 11 साल की है। 

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