कोयलांचल में सब काला ही काला, लापरवाही और लोभ का दंश, झेल रहा गौ वंश

आंख मूंद बैठे जिम्मेदार, कौन, कैसे रोकेगा अवैध कारोबार
” पद, प्रतिष्ठा, मजबूरी, कर्तव्य निष्ठा या मक्कारी, साजिश और अवैध धन लिप्सा के चलते लोग किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी तो ले लेते हैं लेकिन उसे निभाते नहीं जिसका खामियाजा संबंधित क्षेत्र की जनता ही नहीं निरीह मूक मवेशियों को भी भुगतना पड़ता है। सोहागपुर कोयलांचल इस कटु सत्य का जीवंत प्रमाण है जहां के लोग तो लापरवाही और लोभ के दुर्योग के चलते नारकीय जीवन जीने को विवश हैं ही, आए दिन मूक मवेशियों को भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते उत्पन्न हालात के मद्देनजर दिल-दिमाग यही कह सकता है कि कोयलांचल में सब काला ही काला है।”
धनपुरी (मो. शमीम खान)। देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक बड़ी भूमिका निभाने वाले सार्वजनिक उपक्रम कोल इंडिया अंतर्गत साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लि. के सोहागपुर एरिया मुख्यालय धनपुरी नगर और संपूर्ण कोयलांचल में कानून व्यवस्था के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों के निर्वहन के लिये शासन द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि कोयला उत्पादन के साथ ही अपराध, प्रदूषण, अवांछित गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ ही स्थानीय रहवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकें लेकिन यह कोयलांचल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि विभागीय जिम्मदारों ने कथित अर्थिक समीकरणों के चलते अपनी आंखों पर ऐसी पट्टी बांध रखी है कि समूचे कोयलांचल में त्राहि-त्राहि मची है जिसे देखने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि हर छोटा-बड़ा सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने में जुटा है, नेता हो या अधिकारी सब के सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे नजर आ रहे हैं।
भटका नगर प्रशासन
नगर विकास और जन सुविधाओं का प्रथम दायित्व नगर प्रशासन का है। धनपुरी नगर प्रशासन के बारे में कहा जाता है कि वह स्वयं भटाका हुआ और बेजा कब्जे का शिकार है। नगर सत्ता और प्रशासन को आम जन और उनकी सुविधाओं से कोई सरोकर नहीं है। नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ कमाई वाले कार्यों को प्राथमिकता देने वाले वाले पालिका के ओहदे दारों की लापरवाही के चलते नगर की जनता शुद्व पेयजल, सफाई, समतल सडक़, स्ट्रीट लाइट, एक अदद बस स्टैंड जैसी बुनियादी सुविधाओं की मोहताज है और नगर सत्ता और प्रशासन में बैठे लोगों की तोंद अवैध कमाई की बदौलत महंगाई की तरह रोज बढ़ रही है।
हफ्ते- महीने में सीमित थाना
जिला ही नहीं संभाग और पूरे प्रदेश के लोगों को ज्ञात है कि जिले में सर्वाधिक आपराधिक गतिविधियां कोयलांचल क्षेत्र में ही देखने को मिलती हैं। हालांकि शासन ने सोहागपुर कोयलांचल मुख्यालय में न सिर्फ थाना खोला बल्कि अनुविभागीय अधिकारी पुलिस यानी एसडीओपी की भी पदस्थापना भी कर दी ताकि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां अपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके लेकिन वास्तव में ऐसा हुआ नहीं। जुआ, सट्टा, कोयला-कबाड़ चोरी, डीजल चोरी, पशु तस्करी, एवं अन्य सभी प्रकार के अपराध जिस तेजी के साथ बढ़े हैं उनको देखकर कोई भी यह मानने को तैयार नहीं है कि धनपुरी थाना पुलिस के लोग हफ्ता-महीना अभियान के अलावा किसी भी चीज को महत्व नहीं दे रहे हैं।
कुंभकर्णी निद्रा में पीसीबी
प्रदूषण नियंत्रण के लिये शासन द्वारा जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पीसीबी का कार्यालय स्थापित किया गया है जो शायद कागजों ही सीािम होकर रह गया है। पिछले हफ्ते अमलाई ओसीएम में जहरीला केमिकल फेंके जाने के परिणाम स्वरूप एक दर्जन से अधिक गौ वेश की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, इसके पूर्व भी कई बार बेजुबान जानवरों को अपनी जान देनी पड़ी है लेकिन पीसीबी की कानों में जॅू तक नहीं रेंगी। जानकार सूत्रों की मानें तो एसईसीएल सोहागपुर एरिया के अधिकारियों से सांठगांठ का ही नतीजा है कि बड़ी से बड़ी घटना हो जाने के बाद भी पीसीबी द्वारा कभी कोई कार्यवाही एसईसीएल के अधिकारियों या प्रबंधन के खिलाफ नहीं की जाती है। इसके अलावा अवैध ईट भट्ठों की भरमार, यहां तक कि पूरा का पूरा बाबूलाल फुटबॉल मैदान ईट भट्ठों की भेंट चढ़ जाने के बाद भी पीसीबी का मुंह तक नहीं खुला कार्यवाही तो दूर की बात है।
भू संरक्षण के नाम पर घोटाले
एसईसीएल द्वारा सोहागपुर कोयलांचल में बड़ी संख्या में खुली खदानों का संचालन किया जा रहा है। कोयला उत्खनन के नाम पर जंगलों का नाश कर मिटटी का जो पहाड़ खड़ा किया जाता है उसमें वृक्षारोपण कर भूमि संरक्षण का दायित्व वन विकास निगम को सोंपा गया है लेकिन संबंधित विभाग अपनी इस जिम्मेदारी से कोसों दूर नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारी कॉलरी प्रबंधन से सेटिंग कर अपनी ही मौज में डूबे हुए हैं और जिला प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी भीचुप्पी साधे बैठे हैं परिणामस्वरूप पर्यावरण का सत्यानाश बदस्तूर जारी है।
पशु तस्करी का घिनौना कारनामा
बीते दिनों गौ वंश की हत्या और गौ मांस के अवैण कारोबार से जुड़ा वीडियों बड़ी तेजी से वायरल हुआ, आरोपी पकड़ भी लिये गए। बड़े पैमाने पर विरोध भी हुआ जो होना भी चाहिए लेकिन सवाल यह उठता है कि यह कुत्सित कारोबार कब से किसके संरक्षण में चल रहा है। जानकार लोगों का मानना है कि अपराधी कितना ही शातिर या पहुंच वाला क्यों न हो पुलिस की रजामंदी या शह के बिना अपराध को अंजाम नहीं दे सकता है। पशु तस्करी जिला नहीं संभाग व्यापी समस्या है लेकिन सरेआम गौ हत्या और गौमांस के कारोबार का प्रमाण धनपुरी में मिला है जो पुलिस की भूमिका को कटधरे में ला खड़ा करता है। इस वारदात के बाद पूरे जिले के लोग आक्रोशित हैं सभी ने निंदा भी की हैं लेकिन मामले की तह तक पहुंचकर प्रभावी कार्यवाही नितांत आवश्यक है।