शहडोल में कानून ‘लापता’! एसडीएम का आदेश रौंदते भूमाफिया, पुलिस बनी ढाल—पुश्तैनी जमीन पर खुलेआम कब्ज़ा

स्थगन आदेश काग़ज़ का तमाशा! बुढ़ार में दबंगों का ऐलान—“हम पर कानून लागू नहीं होता”
शहडोल।क्या शहडोल जिले में कानून अब सिर्फ फाइलों और आदेश पत्रों तक सीमित रह गया है?
क्या प्रशासनिक आदेश अब भूमाफियाओं के सामने बेमानी हो चुके हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या बुढ़ार पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की शपथ भूलकर भूमाफियाओं की संरक्षक बन चुकी है?
ग्राम पकरिया, बुढ़ार तहसील से सामने आया यह मामला इन तमाम सवालों को चीख-चीखकर उठा रहा है। यहां अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सोहागपुर के स्पष्ट स्थगन आदेश को खुलेआम रौंदते हुए दबंगों ने पुश्तैनी जमीन पर कब्ज़ा कर अवैध निर्माण का खेल जारी रखा है—और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
पुश्तैनी जमीन पर डाका, 43–44 डिसमिल पर जबरन कब्ज़ा
पीड़ित अमरनाथ साहू, पिता स्व. जयकरण साहू, निवासी वार्ड क्रमांक-5 पुरानी बस्ती बुढ़ार का आरोप है कि ग्राम पकरिया स्थित उनकी कृषि भूमि खसरा क्रमांक 180/1/1/1/1, कुल रकबा 0.1283 हेक्टेयर (23.5 डिसमिल) है। भूमि का एक भाग उन्होंने वैधानिक रूप से विक्रय किया, किंतु शेष भूमि पर उनका वैध स्वामित्व आज भी है।
इसके बावजूद लल्लू केवट, शिवशंकर यादव, हेमलाल यादव, रोशनी यादव सहित अन्य लोग संगठित तरीके से 43–44 डिसमिल तक जबरन कब्ज़ा कर चुके हैं। न सीमांकन, न नक्शा-तरमीम, न अनुमति—बस ताक़त और दहशत के बल पर पक्के निर्माण खड़े किए जा रहे हैं।
एसडीएम का आदेश रौंदा, कानून को दी खुली चुनौती
इस भूमि विवाद में एसडीएम सोहागपुर द्वारा स्पष्ट ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का स्थगन आदेश पारित किया गया है, जिसमें किसी भी प्रकार के निर्माण, तोड़फोड़ या परिवर्तन पर पूर्ण रोक है।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि—
दीवारें खड़ी की जा रही हैं,
नींव खोदी जा रही है,
निर्माण सामग्री बेरोकटोक पहुंचाई जा रही है।
पीड़ित का दावा है कि दबंग खुलेआम कहते हैं—
“हुकूमत हमारी है, आदेश हमें नहीं रोक सकता।”
अगर यह सच है, तो सवाल यह है कि आख़िर किसके दम पर कानून की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं?
पुलिस पर सबसे गंभीर आरोप—वर्दी में खामोशी या खुला संरक्षण?
सबसे सनसनीखेज़ आरोप बुढ़ार पुलिस पर है। पीड़ित का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस न तो निर्माण रुकवाती है, न ही किसी आरोपी पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करती है।
स्थगन आदेश लागू कराना पुलिस की जिम्मेदारी है—लेकिन यहां पुलिस की चुप्पी ने दबंगों के हौसले इतने बढ़ा दिए हैं कि वे आदेश को “काग़ज़ का टुकड़ा” बताने लगे हैं।
देशभक्ति, कानून और जनसेवा की कसमें खाने वाली पुलिस आख़िर भूमाफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक दिख रही है?
क्या बुढ़ार थाना अब न्याय का केंद्र नहीं, बल्कि रसूखदारों की शरणस्थली बन चुका है?
सीमांकन भी बेअसर—प्रशासनिक तंत्र की पोल खुली
पीड़ित ने अपनी भूमि का विधिवत सीमांकन भी करा लिया है, जिसमें वास्तविक सीमाएं स्पष्ट हैं। इसके बावजूद कब्ज़ा जारी है। यह सीधे तौर पर दर्शाता है कि काग़ज़ों में कानून ज़िंदा है, लेकिन ज़मीन पर मरा पड़ा है।
ग्रामीणों में उबाल—कानून बचेगा या दबंग जीतेंगे?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला अब एक व्यक्ति की जमीन का नहीं रहा। यह सवाल है कि—
क्या शहडोल में कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है?
क्या रसूखदारों के लिए अलग संविधान लागू होता है?
क्या प्रशासन और पुलिस मिलकर अवैध कब्जों को मौन स्वीकृति दे रहे हैं?
पीड़ित की मांग—अब आर-पार की लड़ाई
अमरनाथ साहू ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
स्थगन आदेश का तत्काल और सख़्त पालन कराया जाए,
अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए,
आरोपियों पर अवैध कब्जा, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी और आदेश उल्लंघन की धाराओं में एफआईआर दर्ज हो,
तथा बुढ़ार पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अब फैसला प्रशासन के हाथ
ग्राम पकरिया का यह मामला अब शहडोल जिले में कानून की साख, पुलिस की ईमानदारी और प्रशासन की इच्छाशक्ति का लिटमस टेस्ट बन चुका है।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि शहडोल में कानून नहीं, बल्कि दबंगों का शासन चलता है।
अब देखना यह है कि—
कानून जागेगा या एक और पुश्तैनी जमीन ताक़त के आगे हार जाएगी?