February 2, 2026

BREKING,अमलाई ओसीएम में 3 माह बाद मिला बड़ा रेस्क्यू सफलता का क्षण, डोजर से बरामद हुआ मृतक अनिल कुशवाहा का शव

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शहडोल धनपुरी / बीते दिनों 11 अक्टूबर 2025 को शाम लगभग 5 बजे एसईसीएल अमलाई ओसीएम खदान में एक दर्दनाक हादसे के दौरान डोजर पलटने से ऑपरेटर अनिल कुशवाहा डोजर सहित पानी में डूब गया था। हादसे के बाद एनडीआरएफ एवं एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की रेस्क्यू टीमों द्वारा लगातार कई दिनों तक गहन खोज अभियान चलाया गया, किंतु पानी की अत्यधिक गहराई, कीचड़, ठंड और सीमित दृश्यता के कारण मृतक का कोई सुराग नहीं मिल पाया। परिस्थितियों को देखते हुए उस समय रेस्क्यू ऑपरेशन स्थगित करना पड़ा था।
इसके बाद करीब तीन माह तक खदान से बड़ी-बड़ी मोटरों की सहायता से लगातार पानी निकाला जाता रहा। बीते दिन शाम को जब पानी का स्तर कुछ कम हुआ, तब डोजर के कुछ हिस्से नजर आने लगे। अमलाई ओसीएम प्रबंधन द्वारा तत्काल इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू प्रभारी, आर डी पटेल, कैप्टन अमरजीत सिंह,अपने दल के साथ अमलाई ओसीएम पहुंचे और डोजर से शव निकालने की रणनीति तैयार की गई।
एनडीआरएफ टीम, सोहागपुर क्षेत्र की रेस्क्यू टीम एवं सुमित कुमार गुर्जर तहसीलदार बुढ़ार, मनोज सिंह नायब तहसीलदार बुढ़ार एसडीओपी धनपुरी विकास पांडे के कुशल नेतृत्व में यह ऑपरेशन पुनः शुरू किया गया। मौके पर थाना प्रभारी धनपुरी खेम सिंह पेंदो, थाना प्रभारी बुढ़ार विनय सिंह, थाना प्रभारी अमलाई जय प्रकाश शर्मा सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। आरकेटीसी कंपनी का पूरा स्टाफ भी ऑपरेशन के दौरान मौके पर तैनात रहा।और टीम का पूरा सहयोग करता नज़र आया।

इस रेस्क्यू अभियान में टीम को कड़ाके की ठंड, गहरे पानी, कीचड़, भारी मशीनरी और लंबे समय तक डूबे डोजर से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार गोताखोरों को जोखिम उठाकर ठंडे पानी में उतरना पड़ा। बावजूद इसके, टीम के अथक प्रयास और समर्पण के चलते अंततः तीन माह पूर्व डूबे डोजर से मृतक अनिल कुशवाहा के शव को बाहर निकालने में सफलता मिली।
इस सफलता पर चारों ओर एनडीआरएफ एवं सोहागपुर क्षेत्र की रेस्क्यू टीम की सराहना की जा रही है। यह रेस्क्यू अभियान असंभव-सा प्रतीत हो रहा था, लेकिन टीम ने दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वय से उसे संभव कर दिखाया।

रेस्क्यू कैप्टन अमरजीत सिंह का कथन—
“यह ऑपरेशन हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। खदान में लंबे समय तक भरा पानी, अत्यधिक ठंड, सीमित दृश्यता और भारी डोजर के कारण हर कदम जोखिम से भरा था। हमारी टीम ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। एनडीआरएफ, सोहागपुर रेस्क्यू टीम, पुलिस प्रशासन और खदान प्रबंधन के आपसी सहयोग से यह संभव हो पाया। हमारा उद्देश्य केवल यही था कि मृतक के परिजनों को उनका अंतिम अधिकार मिल सके। टीम के हर सदस्य ने साहस, धैर्य और समर्पण का परिचय दिया, उसी का परिणाम आज सामने है।”
इस ऑपरेशन में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में आर.डी. पटेल (प्रभारी अधिकारी, रेस्क्यू सोहागपुर क्षेत्र), अमरजीत सिंह (कैप्टन), श्रेयस राव, अमित वायकर, आदित्य प्रकाश, अशोक रजक, अनिल चौधरी, अयोध्या यादव, विनीत दुबे एवं विनय तिवारी सहित पूरी रेस्क्यू टीम शामिल रही।

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