श्रद्धांजलि के अश्रु: संवेदनशील न्यायिक मन ने झुकाया मस्तक, पत्रकार चंद्रेश मिश्रा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

धनपुरी (शहडोल) – पत्रकारिता जगत के एक उज्ज्वल, कर्मठ और संवेदनशील स्तंभ, स्वर्गीय चंद्रेश कुमार मिश्रा के आकस्मिक निधन से संपूर्ण क्षेत्र शोक की गहन पीड़ा में डूबा हुआ है। उनकी असमय विदाई ने न केवल पत्रकारिता जगत, बल्कि सामाजिक जीवन में भी एक ऐसी रिक्तता उत्पन्न कर दी है, जिसकी भरपाई असंभव प्रतीत होती है।
इसी क्रम में अल्प प्रवास पर धनपुरी पहुँचे जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री हिदायत उल्ला खान ने स्वर्गीय चंद्रेश मिश्रा के निज निवास पहुँचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर गहन संवेदना व्यक्त की और इस असहनीय दुःख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया।
श्रद्धा, करुणा और संवेदना से ओतप्रोत वातावरण में माननीय श्री खान ने स्वर्गीय चंद्रेश मिश्रा को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि समाज और पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने भावुक स्वर में कहा—
“जब भी मैं धनपुरी आता था, चंद्रेश जी से मुलाकात अवश्य होती थी। उनकी सरलता, सौम्यता और आत्मीय व्यवहार हर किसी को अपना बना लेता था। आज यह विश्वास करना अत्यंत कठिन है कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं।”
माननीय जिला न्यायाधीश ने कहा कि स्वर्गीय चंद्रेश मिश्रा अत्यंत धार्मिक, सेवाभावी और सदैव मुस्कान बिखेरने वाले व्यक्तित्व के धनी थे। समाजसेवा, जनहित और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा अनुकरणीय थी। दूसरों की सहायता करना उनके जीवन का स्वभाव बन चुका था।
उन्होंने बताया कि जब उन्हें चंद्रेश मिश्रा के असामयिक निधन का समाचार प्राप्त हुआ, उस समय वे देपालपुर (इंदौर) में थे और यह सूचना उनके लिए किसी बज्रपात से कम नहीं थी।
श्री खान ने कहा कि चंद्रेश मिश्रा केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे समाज की चेतना और जनआवाज़ थे। अल्प आयु में उन्होंने जो स्नेह, सद्भाव और विश्वास लोगों के हृदय में अंकित किया, वह सदैव अमिट रहेगा।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय चंद्रेश मिश्रा की स्मृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता की प्रेरणा देती रहेंगी।
अंत में माननीय श्री खान ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति तथा शोकसंतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
आज धनपुरी की धरती ने एक संवेदनशील कलम, एक सशक्त आवाज़ और एक नेक इंसान को नम आँखों से विदाई दी।