February 2, 2026

इतिहास के नए अध्याय की ओर बुढ़ार का अधिवक्ता समाज राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव में जयकांत मिश्रा को मिल रहा अभूतपूर्व समर्थन

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शहडोल।न्याय, निष्ठा और संगठनात्मक समर्पण की त्रिवेणी पर खड़े अधिवक्ता जयकांत मिश्रा (एड.) मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के आगामी चुनाव में सदस्य पद के लिए एक सशक्त, विश्वसनीय और सर्वमान्य प्रत्याशी के रूप में उभर कर सामने आए हैं। अधिवक्ता संघ बुढ़ार के अध्यक्ष के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके जयकांत मिश्रा इन दिनों जिले सहित प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अधिवक्ताओं से जनसंपर्क कर रहे हैं, जहाँ उन्हें व्यापक समर्थन और सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है।
उनके समर्थन में उमड़ता अधिवक्ता समाज केवल एक व्यक्ति के पक्ष में खड़ा नहीं दिख रहा, बल्कि यह बुढ़ार अंचल के ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व की पुनर्स्थापना का सशक्त संकेत भी है। संपर्क अभियानों के दौरान जिस उत्साह, आत्मीयता और विश्वास का वातावरण देखने को मिल रहा है, उससे उनके सहयोगियों और समर्थक अधिवक्ताओं में विशेष ऊर्जा और सक्रियता व्याप्त है।
इतिहास की पृष्ठभूमि, भविष्य की उम्मीद
गौरतलब है कि ब्रिटिश शासनकाल में, रीवा रियासत के महाराजा श्री गुलाब सिंह जूदेव के समय बुढ़ार न्यायालय की स्थापना हुई थी। लगभग 90 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह पहला अवसर है जब बुढ़ार अंचल से कोई अधिवक्ता राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। यह तथ्य अपने आप में बुढ़ार के अधिवक्ता समाज के लिए गौरव और आशा का विषय है।
मिलनसार व्यक्तित्व, सशक्त नेतृत्व
अधिवक्ता जयकांत मिश्रा अपने सहज, सरल और मिलनसार स्वभाव के लिए अधिवक्ता जगत में व्यापक रूप से जाने जाते हैं। अधिवक्ता संघ बुढ़ार के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने संगठन की अपेक्षाओं के अनुरूप दायित्वों का निष्ठापूर्वक और प्रभावी निर्वहन किया है। वे न केवल संघीय दायित्वों में सक्रिय रहे हैं, बल्कि पीड़ित पक्षकारों को न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहकर अधिवक्ता समाज में विश्वास का सेतु बने हैं।
उनकी यही कार्यशैली उन्हें मध्यप्रदेश के अधिवक्ताओं के बीच लोकप्रिय और विश्वसनीय बनाती है। आगामी राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव में वे अधिवक्ताओं से वरीयता क्रम–1 में समर्थन देने का आग्रह करते हुए आत्मीय संवाद के माध्यम से संपर्क कर रहे हैं।
प्रतिनिधित्व की कमी से उपजा संकल्प
उल्लेखनीय है कि राज्य अधिवक्ता परिषद के पिछले सत्र (2018–19) में 25 सदस्य निर्वाचित हुए थे, किंतु बुढ़ार एवं आसपास के अंचल से कोई प्रतिनिध परिषद में नहीं पहुँच सका। परिणामस्वरूप स्थानीय अधिवक्ताओं की अनेक व्यावहारिक समस्याओं को वह मंच नहीं मिल पाया, जिसकी अपेक्षा थी।
इसी पृष्ठभूमि में इस बार अधिवक्ताओं में यह दृढ़ संकल्प दिखाई दे रहा है कि बुढ़ार अंचल की आवाज़ को राज्य अधिवक्ता परिषद तक पहुँचाया जाए। जयकांत मिश्रा की उम्मीदवारी को इसी सामूहिक भावना का प्रतिफल माना जा रहा है।
न्याय की आवाज़, परिषद तक पहुँचाने का संकल्प
समग्रतः, जयकांत मिश्रा (एड.) की उम्मीदवारी केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि इतिहास, संगठन और भविष्य की साझा आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। जिस तरह उन्हें अधिवक्ताओं का समर्थन मिल रहा है, वह यह संकेत देता है कि इस बार बुढ़ार अंचल का अधिवक्ता समाज अपने प्रतिनिधित्व के लिए पूरी दृढ़ता के साथ एकजुट खड़ा है।

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