श्री हरमंदिर साहिब को एफसीआरए की अनुमति देना एक पथप्रदर्शक निर्णय : अमित शाह

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नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरमंदिर साहिब को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत अनुमति दिए जाने के फैसले को पथप्रदर्शक और ऐतिहासिक बताया है। अपने ट्वीट में शाह ने कहा कि “श्री दरबार साहिब की दिव्यता हम सबको शक्ति प्रदान करती है। कई दशकों से दुनियाभर में व्याप्त संगत उनकी सेवा नहीं कर पा रही थी। मोदी सरकार के श्री हरमंदिर साहिब को एफसीआरए की अनुमति देने के फैसले से दरबार साहिब और पूरे विश्व में उनकी संगत के बीच सेवाभाव और अधिक गहरा होगा। यह हम सबके लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है”।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि “वाहे गुरु जी ने यह सेवा करने का मौका प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को दिया यह भी बहुत सौभाग्य की बात है। श्री हरमंदिर साहिब को एफसीआरए की अनुमति देना एक पथप्रदर्शक निर्णय है जो फिर एक बार हमारे सिख बहनों और भाइयों की सेवा की उत्कृष्ट भावना को प्रदर्शित करेगा”।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार (09.09.2020) को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री दरबार साहिब, पंजाब संस्था को एफसीआरए पंजीकरण की मंज़ूरी प्रदान की। इस संस्था ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए), 2010 के तहत 27.05.2020 को आवेदन किया था। यह पंजीकरण जारी होने की तारीख़ से 5 साल तक वैध रहेगा।

सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री दरबार साहिब के पंजीकरण को मंज़ूरी देने से पहले, इस संस्था के आवेदन की एफसीआरए, 2010 और विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम (एफसीआरआर), 2011 के अंतर्गत जाँच की गई। संबंधित क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी और इस संस्था द्वारा आवेदन के साथ दिए गए दस्तावेज़ों के आधार पर यह निर्धारित हुआ कि यह संस्था एफसीआरए, 2010 और उसके अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार निर्धारित मानदंडों को पूरा करती है।

पंजाब के अमृतसर में स्थित और गोल्डन टेम्पल के नाम से प्रसिद्ध, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री दरबार साहिब संस्था की स्थापना 1925 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य जनता/श्रद्धालुओं को चौबीस घंटे फ्री लंगर उपलब्ध कराना, गरीब और ज़रूरतमंदों, छात्रों को वित्तीय सहायता देना, ज़रूरतमंद लोगों को चिकित्सा के लिए वित्तीय मदद देना और प्राकृतिक आपदा के समय सेवा प्रदान करना है। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए संस्था को घरेलू दान मिल रहा था। केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अनुमति मिलने के बाद अब यह संस्था एफसीआरए, 2010 के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए बताए गए उद्देश्यों को पूरा के लिए विदेशों से भी अंशदान हासिल कर सकती है।

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