February 3, 2026

दूषित पानी पीने को मजबूर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र,

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जोगी एक्सप्रेस 

सूरजपुर/ब्यूरो अजय तिवारी ,बिहारपुर:- जिले के वनांचल क्षेत्र मे बसे ग्राम बैजनपाठ में  राष्ट्रपति दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पण्डो जनजाति के लगभग 33 परिवार के लोग  पिछले कई दशको से निवासरत हैं जो की पड़ोसी राज्य  मध्यप्रदेश से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाते थे जिस मामले को मीडिया ने प्रमुखता से  समाचार प्रकाशित करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यानाकर्षण भी कराया था जिसे गम्भीरता से लेते हुए तत्काल  46.78 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए पेयजल की व्यवस्था हेतु सोलर पम्प के माध्यम से लोगों तक शुद्ध पानी पहुंचाने का निर्णय लिया गया जिसका कार्य भी पूर्ण हो गया लेकिन इन पंडोजनजाति के लोगो को आज भी पानी के लिए 2 से 3 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है
 क्योंकि उक्त गांव चार भागों मे बॅटा हुआ है  यादव पारा , बीचपारा ,पण्डो पारा भाग 1 ,पण्डो पारा भाग 2,जिसमे मात्र 2000 लीटर क्षमता की   तीन टँकी  लगाई गई है जिसमे दो टंकी यादव पारा व एक टंकी बीचपारा मे स्थापित किया गया है  तथा पण्डोपारा भाग-1 व भाग -2 के ग्रामीणो को  जिसमे  पण्डो पंडो जनजाति के लोग निवासरत है उनको  पानी नहीं मिल पा रहा है।पंडो जनजाति के लोगो को पानी न मिलने के पीछे  एक मुख्य कारण यह भी है कि बैजनपाठ ग्राम की जनसंख्या लगभग 450  है जहां पर लोग घनी बस्ती मे ना बसकर दूर दूर मे बसे हुए हैं जो की पारो में विभाजित है  तथा प्रत्येक पारा कि दुरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर है।
 वहीँ  पंडो जनजाति के लोगो को पानी के लिए जो टंकी लगाया गया है वह लगभग 2 से 3 कि.मी. दूरी पर स्थित है जो की बघोर नामक नाला जहॉ से पूर्व में इस जनजाति के लोगो द्वारा  पानी लाया जाता था  बराबर दुरी पर है।

आवेदन पर नही दिया जाता ध्यान-

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि  कलेक्टर जनदर्शन ,कलेक्टर कार्यालय ,डिप्टी कलेक्टर  सहित जिम्मेदार अधिकारियो को  कई बार इस सम्बन्ध में  लिखित आवेदन दिया गया  परंतु उनके द्वारा सिर्फ  यह कहकर की शासन द्वारा स्वीकृत राशि और स्टीमेट के अनुसार  कार्य पुर्ण कर दिया है,  जिसकी पूर्ण राशि खर्च हो चुकी है इसलिए अलग से टंकी लगाना संभव नहीं है।

स्थिति आज भी है जस की तस

 वर्तमान में तो पंडो जनजाति के लोग  तालाब व नाले का पानी पीकर किसी तरह गुजारा कर ले रहे हैं परंतु आने वाले गर्मी के मौसम मे उक्त परिवारों को फिर से पड़ोसी राज्य से ही प्यास बुझाना पड़ेगा ।
वहिं पण्डोपारा जनजाति के लोगों का कहना है कि हमारे दोनों पारा मे पांच-पांच हजार लीटर वाला टंकी स्थापित किया  जिसमे से एक टंकी  पण्डोपारा भाग-1 मे शिवमंगल पण्डो व मंगलु पण्डो के घर के बीच मे  तथा एक टंकी पण्डोपारा भाग -2 मे फुलसाय पण्डो व गंगा पण्डो के घर के बीच में लगाया जाये तो पानी की समस्या से निजात मिल सकता है। उनका तो यह भी कहना है कि
 वैसे भी हमारे गांव मे पानी के अलावा सड़क,बीजली,स्कुल भवन की सुविधा आज भी नहीं है एवम मरीजों को  आज भी खाट पर ढोकर इलाज के लिए ले जाना पड़ता है।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र वैसे भी मलेरिया प्रभावित क्षेत्र है जहाँ पर अब तक दर्जनों लोगो की मौत हो चुकी है ।अगर ग्रामीणों की मांग   पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो लोग दूषित पानी पीकर हमेशा बीमार होते हुए मौत के घाट उतरते रहेंगे  ।

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