बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम : केदार कश्यप

‘मोर अंगना के शोर’ साझा बाल काव्य संग्रह का भव्य विमोचन
क्यूआर कोड आधारित नवाचार की सराहना, साहित्य और तकनीक के समन्वय को बताया शिक्षा का भविष्य
रायपुर, 29 जून 2026। वनमंत्री केदार कश्यप राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में आयोजित साहित्य समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साझा बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ का विमोचन किया तथा पुस्तक से जुड़े रचनाकारों, शिक्षकों और साहित्यकारों का सम्मान किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों की शिक्षा, संस्कार और रचनात्मक सोच पर आधारित होता है। बाल साहित्य बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है, जो उनमें संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल का विकास करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनात्मक पहलें नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ-साथ संस्कृति और समाज से भी जोड़ने का कार्य करती हैं।
नई शिक्षा नीति और एफएलएन अभियान को मिलेगा बल
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि ‘मोर अंगना के शोर’ केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक प्रभावी शैक्षणिक प्रयास है। यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) के उद्देश्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि विषय आधारित बाल कविताएं बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मक क्षमता को भी विकसित करेंगी।
साहित्य और तकनीक का अभिनव संगम बना प्रेरणा
पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता प्रत्येक कविता के साथ जोड़े गए क्यूआर कोड को बताते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह नवाचार शिक्षा को आधुनिक, सरल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। क्यूआर कोड के माध्यम से बच्चे कविता को पढ़ने के साथ-साथ सुन भी सकेंगे, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और सहज बनेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और समावेशी शिक्षा को नई दिशा देगी।
सामूहिक प्रयासों से होगा सशक्त राष्ट्र निर्माण
मंत्री केदार कश्यप ने पुस्तक के संपादक वीरेंद्र कुमार साहू, सभी रचनाकारों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और अधिक सशक्त होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मोर अंगना के शोर’ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।
कार्यक्रम में स्थानीय विधायक अनुज शर्मा, अमित चिमलानी सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, शिक्षाविद, रचनाकार और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।