लोक अदालत में समझौते की मिसाल: 14,233 मामलों का त्वरित समाधान, 2.04 करोड़ से अधिक राशि पर बनी सहमति

एमसीबी। न्याय व्यवस्था को सरल, सुलभ और जनोन्मुख बनाने की दिशा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर न्याय के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान की मिसाल पेश की। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित और प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश पारीक के नेतृत्व में सिविल न्यायालय बैकुण्ठपुर और मनेंद्रगढ़ के लिए कुल 16 खंडपीठों का गठन किया गया, जहां विभिन्न प्रकार के प्रकरणों की सुनवाई की गई। न्यायालयों में लंबित कुल 3,833 मामलों को लोक अदालत के समक्ष रखा गया था, जिनमें से 3,063 प्रकरणों का सफल निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया गया। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 81 लाख 42 हजार 826 रुपए की राशि का सेटलमेंट हुआ।
लोक अदालत की इस प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों के साथ अधिवक्ताओं और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। इस सामूहिक प्रयास ने पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए कम समय में न्याय प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।
राजस्व प्रकरणों के समाधान के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई थी। इसके तहत कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर खंडपीठों का गठन किया गया। राजस्व न्यायालय बैकुण्ठपुर में 9 खंडपीठों और एमसीबी जिले में 19 खंडपीठों के माध्यम से सुनवाई की गई। इन खंडपीठों के जरिए राजस्व जिला कोरिया और एमसीबी से जुड़े कुल 11,063 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिली।
इसके अतिरिक्त बैंक, नगर पालिका, दूरसंचार और राजस्व विभाग से जुड़े प्रीलिटिगेशन मामलों को भी लोक अदालत में शामिल किया गया। कुल 15,097 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों को लोक अदालत के समक्ष रखा गया, जिनमें से 11,170 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा हुआ।
इस प्रकार जिला बैकुण्ठपुर कोरिया और मनेंद्रगढ़ में कुल 18,930 मामलों को लोक अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिनमें से 14,233 प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामा के आधार पर समाधान किया गया। इन प्रकरणों में कुल 2 करोड़ 4 लाख 40 हजार 974 रुपए की राशि का सेटलमेंट हुआ।
लोक अदालत की इस पहल ने न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से न्यायिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। बड़ी संख्या में पक्षकारों ने इस मंच का लाभ उठाते हुए अपने विवादों का सौहार्दपूर्ण अंत किया और त्वरित न्याय की इस व्यवस्था की सराहना की।