लोक अदालत आपकी प्रेम और भाईचारे के संदेश का सशक्त मंच – जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान

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लोक अदालत में आपसी सहमति से सुलझे विवाद, 1 करोड़ 70 लाख से अधिक के अवार्ड पारित

देपालपुर (इंदौर) – तहसील विधिक सेवा समिति देपालपुर के तत्वावधान में आयोजित नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ शनिवार को गरिमामय और भावनात्मक वातावरण में हुआ। लोक अदालत के माध्यम से वर्षों से लंबित प्रकरणों का सौहार्दपूर्ण निराकरण कर न्याय को सरल, त्वरित और मानवीय स्वरूप प्रदान किया गया।
इस अवसर पर एक मार्मिक घटना ने सभी को भावुक कर दिया, जब पारिवारिक कारणों से पिछले पाँच-छह वर्षों से अलग-अलग रह रहे एक बुजुर्ग दंपत्ति के बीच समझौता कराया गया और दोनों को पुनः सम्मानपूर्वक साथ-साथ अपने घर विदा किया गया। इस दृश्य ने अदालत परिसर में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और लोक अदालत के उद्देश्य को सार्थक रूप में सामने रखा।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने नेशनल लोक अदालत के महत्व और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक अदालत केवल मुकदमों के निराकरण का मंच नहीं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास, प्रेम और सौहार्द को मजबूत करने का माध्यम है।
उन्होंने अपने उद्बोधन में स्व-रचित कविता और ग़ज़ल के माध्यम से उपस्थित पक्षकारों को प्रेरित करते हुए रंगों के पर्व होली और पवित्र माह रमजान की शुभकामनाएँ भी दीं तथा कहा कि समझौता ही वह मार्ग है जो रिश्तों को बचाता है और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य यह है कि लोग आपसी संवाद और समझदारी से अपने विवादों का समाधान करें, जिससे समय, धन और रिश्तों, तीनों की रक्षा हो सके। उन्होंने पक्षकारों से अपील की कि वे लंबी मुकदमेबाजी से बचते हुए आपसी सहमति और राजीनामे के माध्यम से विवादों का समाधान करें।
इस अवसर पर सीनियर सिविल जज श्रीमती रिजवाना कौसर, न्यायिक मजिस्ट्रेट दिव्या श्रीवास्तव, एडीपीओ विक्रम राव बेन, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अंतर सिंह मौर्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र पटेल ने भी पक्षकारों से लोक अदालत का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।
नेशनल लोक अदालत में न्यायालय के कुल 53 प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण कर लगभग 1 करोड़ 70 लाख 57 हजार रुपये से अधिक का अवार्ड पारित किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंकों के 144 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में लगभग 36 लाख 88 हजार रुपये की वसूली तथा नगर परिषद के प्रकरणों में लगभग 4 लाख 90 हजार रुपये की वसूली की गई।
इस अवसर पर अधिवक्ता पवन जोशी, चिंतामन बाथम, विपिन धाकड़, गणेश राठौर, सचिन बैरागी, कैलाश चौधरी, चंद्रेश यादव, युवराज नागर, मालती जोशी, दुलेन्द्र जैन, विद्या सोलंकी सहित न्यायालयीन कर्मचारी, विभिन्न बैंकों एवं नगर परिषद के अधिकारी तथा अनेक पक्षकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता चेतन हार्डिया ने किया तथा आभार नायब नाजिर दिलीप यादव ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी जनों ने लोक अदालत की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज में सुलभ, त्वरित और मानवीय न्याय का प्रभावी माध्यम बताया।

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