छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण का अर्धदिवसीय सेमिनार: ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं पर मंथन

रायपुर।
छत्तीसगढ़ को ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने और ग्लोबल क्लीन एनर्जी के विस्तार के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) द्वारा कोर्टयार्ड बाय मैरियट में अर्धदिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग के सचिव रोहित यादव (आईएएस) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सचिव रोहित यादव ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक परिवेश में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना तथा पारंपरिक औद्योगिक ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ और टिकाऊ विकल्पों को अपनाने की दिशा में ठोस पहल करना है। उन्होंने बताया कि बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार इसे प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य करेगी। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जैविक खेती को प्रोत्साहन और किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएँ भी सुदृढ़ होंगी।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट, फल एवं सब्जी मंडियों का जैविक कचरा तथा गोबर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्नत तकनीक के माध्यम से इनके प्रसंस्करण द्वारा बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।
राज्य में स्टील एवं स्पंज आयरन उद्योग का सशक्त आधार रायपुर और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों—उरला, सिलतरा, भिलाई तथा रायगढ़—में स्थापित है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर एवं बस्तर में भी औद्योगिक इकाइयाँ संचालित हैं। इन क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन को गति मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता होगी।
ग्रीन हाइड्रोजन को औद्योगिक ईंधन के रूप में अपनाने से दोहरा लाभ मिलने की संभावना जताई गई—एक ओर स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी, वहीं बायोमास के मूल्य संवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से आय सृजन और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ऊर्जा विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित सरकार ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा तय करना, संभावित चुनौतियों की पहचान करना तथा व्यापक क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार करना है।
कार्यक्रम में “Hydrogen Economy: Innovation-Led Growth in Industrial Clusters in Chhattisgarh” विषय पर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) के वरिष्ठ वैज्ञानिक सयाजी मैहत्रे ने बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
“Accelerating Green Hydrogen Adoption in Chhattisgarh” विषय पर Ministry of New and Renewable Energy के विषय विशेषज्ञ धर्मेन्द्र कुमार पंचार्या, भिलाई स्टील प्लांट के प्रतिनिधियों एवं अन्य उद्यमियों ने पैनल चर्चा में भाग लिया। सेमिनार में वित्तीय संस्थानों जैसे State Bank of India (एसबीआई) और National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) के प्रतिनिधियों की सहभागिता भी रही।
इसके अतिरिक्त नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े विशेषज्ञ, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के प्रतिनिधि, CSMCRI Bhavnagar, IIT Bhilai के वरिष्ठ वैज्ञानिक, विभिन्न निजी औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि तथा सीबीडीए के अधिकारी उपस्थित रहे।
सेमिनार ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में उपलब्ध संसाधनों और औद्योगिक संरचना के बल पर ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय संभावनाएँ मौजूद हैं, जिन्हें योजनाबद्ध प्रयासों से मूर्त रूप दिया जा सकता है।