रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, खुलेआम अवैध उत्खनन

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खनिज विभाग अधिकारियों के उदासीनता के चलते तमाम नियम रेत माफियाओं के आगे घुटने टेकते नजर आ रहे।

रूपेश वर्मा

बलौदा बाजार/भाटापारा – नदियों से उचित प्रकार से रेत खनन के लिए राज्य शासन ने भले ही तगड़े नियम बनाए हैं परंतु खनिज विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते सारे नियम रेत माफियाओं के सामने घुटने टेकते हुए नजर आ रहे हैं। जिले में रेत घाटों से रेत खनन, लोडिंग तथा बिक्री के लिए आज तक निर्धारित दर नहीं होने की वजह से रेत माफियाओं द्वारा रेत की जमकर कालाबाजारी की जा रही है जिसकी वजह से बीते कुछ ही दिनों में रेत के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं जिस पर जिला प्रशासन द्वारा लगाम लगाया जाना बेहद आवश्यक है। रेत की कालाबाजारी की वजह से रेत के दाम तीन से चार गुना अधिक बढ़ जाने से सामान्य वर्ग के लोगों का अपना घर बनाने का सपना चूर-चूर हो गया है वहीं नगर के ऐन बीच से तेज रफ्तार रेत वाहनों के गुजरने से दुर्घटना की भी आशंका रहती है।

विदित हो कि राज्य शासन के द्वारा रेत घाटो यानि नदी घाटों से रेत का खनन करने के लिए निर्धारित नियमों का जिले के अधिकांश रेत घाटों में पालन नहीं किया जा रहा है। जिले के खनिज विभाग द्वारा तथा पुलिस प्रशासन रेत माफियाओं पर आज तक किसी प्रकार की लगाम लगाने में पूरी तरह से अक्षम साबित हुआ है। जिले के रेत घाटों से 16 अक्टूबर से फिर से रेत का खनन प्रारंभ हो गया है। जिले के कई रेत खदानों में नदियों में अधिक पानी होने की वजह से रेत नहीं निकाली जा रही है जिसकी वजह से रेत माफियाओं के द्वारा रेत की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। बावजूद इसके खनिज तथा पुलिस विभाग इस काला बाजारी को रोकने में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। खनिज विभाग द्वारा रेत की कालाबाजारी को रोकने के लिए ध्यान नहीं दिए जाने से रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं जिसकी वजह से जिले के नदी घाटों से इन दिनों रेत की जमकर कालाबाजारी की जा रही है।

खुलेआम रेत की कालाबाजारी अधिकारी मौन –


रेत की कालाबाजारी होने से बीते कुछ ही दिनों में रेत के दामों में दो से तीन गुना का ईजाफा हुआ है जिससे सबसे अधिक सामान्य वर्ग के लोग को परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेत के दाम बढ़ने से सामान्य वर्ग के लोगों का अपना घर बनाने का सपना चूर-चूर हो गया है तथा घर बनाने में 10 से 15 प्रतिशत का बजट बेवजह बढ़ गया है। बरसात माह के ऐन पूर्व एक ट्रैक्टर रेत का दाम महज 1.5 हजार रूपए से 2 हजार रूपया था जो अब 5 हजार तक पहुंच गया है वहीं एक हाईवा रेत का दाम भी 6 हजार से बढ़कर 16-18 हजार रूपये हो गया है।

दर्जनों वाहन प्रतिदिन रात को दौड़ रहे हैं –

जिला मुख्यालय बलौदा बाजार के इकलौते मुख्य मार्ग से प्रतिदिन रात 10 बजे नो एंट्री खुलते ही दर्जनों रेत भरे वाहन खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए गुजरते हैं। एकमात्र मुख्य मार्ग होने के बावजूद इन वाहनों की गति काफी तेज होती है जिसकी वजह से नगर के अंदर प्रतिदिन दुर्घटना का अंदेशा रहता है। हैरत की बात है कि नगर के इसी इकलौते मुख्य मार्ग के ठीक किनारे सिटी कोतवाली तथा पुलिस विभाग की यातायात शाखा भी स्थित है बावजूद इसके तूफानी गति से दौड़ने वाले रेत वाहनों के खिलाफ पुलिस विभाग द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई ना किया जाना हैरत की बात है।

इनका कहना है..

॰ एसपी के निर्देश पर नियमों के विपरीत चलने वाले सभी वाहनों के खिलाफ यातायात पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई आने वाले दिनों में भी जारी होगी।

प्रमोद कुमार सिंह – टीआईए यातायात, बलौदा बाजार

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