मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में नक्सल प्रभावित जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर। राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में आजीविका संवर्धन हेतु राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य फोकस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि सहला निगार, प्रमुख सचिव सोनमणि वोरा, सचिव भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन, गृह एवं जेल, आदिम जाति कल्याण, ग्रामोद्योग विभाग एवं ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक अनीश कुमार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे राज्य नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, वैसे-वैसे शासन की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं। अब उन क्षेत्रों तक विकास की किरण पहुंचाना आवश्यक है, जो अब तक उपेक्षित रहे हैं। उन्होंने सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए आगामी तीन वर्षों की ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविका मूलक गतिविधियों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत किए, वहीं जिला स्तर के अधिकारियों ने जमीनी अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना बनाई गई है।
बैठक में जिला, विकासखंड एवं क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू करने पर बल दिया गया। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा, ताकि उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आगामी 60 दिनों के भीतर प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा शामिल हो।
इस पहल को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यशाला में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में जीवन स्तर सुधार एवं आय वृद्धि पर विशेष जोर दिया गया। एनसीएईआर के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने आगामी ढाई से तीन वर्षों में इनकी आय बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रमुख सचिव निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी और संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
यह पहल क्लस्टर आधारित और बाजार उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित होगी, जिसमें सशक्त मूल्य श्रृंखला तंत्र विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय नेतृत्व निभाने के निर्देश दिए। नाबार्ड, एफईएस तथा प्रदान जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा लघु वनोपज मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को योजना निर्माण के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र और गतिविधियों के समेकित विकास की अवधारणा को प्रमुखता दी गई है। यह समग्र रणनीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी विकास और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार तैयार करेगी।