खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में स्वर्णिम जलवा: कर्नाटक के मणिकांता की हैट्रिक, छत्तीसगढ़ की अनुष्का ने रचा गौरव

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रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन खिलाड़ियों ने अपने अद्भुत कौशल, साहस और दृढ़ संकल्प से खेलप्रेमियों को रोमांचित कर दिया। कर्नाटक के प्रतिभाशाली तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्णिम हैट्रिक पूरी की और प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने भी महिलाओं की स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी यह दिन गौरवपूर्ण रहा, जब स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। यह उनका प्रतियोगिता में दूसरा पदक है, जिसने प्रदेश के खेल प्रेमियों को गर्व से भर दिया।
देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 3800 खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित आयोजन में नौ खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती जैसी प्रतिस्पर्धाओं में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर लगे हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।
मणिकांता ने 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले को 2:25.93 सेकंड में पूरा कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले भी वे 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन ने कांस्य पदक हासिल किया।
महिलाओं की स्पर्धा में अंजलि मुंडा ने 2:53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने 2:59.33 सेकंड के साथ रजत पदक प्राप्त किया। ओडिशा की अंजलि मलिक को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है।
वेटलिफ्टिंग में भी खिलाड़ियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। असम की मोनिखा सोनोवाल ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 132 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने पीठ दर्द से जूझते हुए शानदार वापसी कर कुल 235 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
यह खेल महाकुंभ केवल पदकों की होड़ नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल बनकर उभर रहा है, जहां हर खिलाड़ी अपनी प्रतिभा से इतिहास रचने की दिशा में अग्रसर है।

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