February 17, 2026

विकसित छत्तीसगढ़’ की दिशा में बड़ा कदम- शिक्षा, कौशल और रोजगार पर मंथन के लिए ‘शिक्षा संवाद’

0
IMG-20260217-WA0079

डिजिटल नवाचार से उद्योग साझेदारी तक- ‘शिक्षा संवाद’ में उच्च शिक्षा के भविष्य की रूपरेखा तय

रायपुर 17 फरवरी 2026/ राज्य में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर समन्वय को लेकर आज ‘शिक्षा संवाद’ का आयोजन रायपुर के स्थानीय होटल में किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की भागीदारी रही। उच्च शिक्षा विभाग और आईआईटी मद्रास और लिंकन युनिवर्सिटी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन,आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन, सीईओ इलेट्स डॉ. रवि गुप्ता, डायरेक्टर आई.सी.एफ.ए.आई.श्री सुधाकर राव,हाइ कमिश्नर ऑफ सैशेल्स एच. ई. हरिसोया लालटीआना सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति,रजिस्ट्रार, प्रोफेसर उपस्थित थे।

     विकसित छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार का सेतु, थीम पर आधारित सत्र में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों के समायोजन और क्षेत्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा हुई। आयोजन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को उद्योग की जरूरतों से जोड़ते हुए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करना है।  विभिन्न सत्रों में नई शिक्षा नीति, कौशल उन्नयन, उद्योग-शिक्षा साझेदारी, स्टार्टअप अवसर और भविष्य की रोजगार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं की रोजगार क्षमता दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा। ‘शिक्षा संवाद’ को छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

     ‘शिक्षा संवाद’ के दूसरे चरण में उच्च शिक्षा को डिजिटल, उद्योगोन्मुख और शोध आधारित बनाने पर गहन मंथन हुआ। विभिन्न सत्रों में कुलपतियों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने के सुझाव प्रस्तुत किए।

डिजिटल इनोवेशन से बदलती उच्च शिक्षा

       इस सत्र में डिजिटल कैंपस, एलएमएस एवं ब्लेंडेड लर्निंग मॉडल, एआई आधारित शिक्षण-मूल्यांकन, डेटा आधारित प्रशासन तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि तकनीक के समुचित उपयोग से पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।

रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए इंडस्ट्रीज-अकादमिक सहयोग

      इस सत्र में उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, इंटर्नशिप एवं अप्रेंटिसशिप, सेक्टर स्किल काउंसिल की भूमिका और परिणाम आधारित शिक्षा पर विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच मजबूत तालमेल से युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर मिलेंगे।

ज्ञान अर्थव्यवस्था की ओर -शोध, नवाचार और उद्यमिता

      अंतिम तकनीकी सत्र में शोध के वर्तमान परिदृश्य, नवाचार केंद्रों की स्थापना, स्टार्टअप प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शोध के व्यावसायीकरण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शिक्षा संस्थानों में इनोवेशन कल्चर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘शिक्षा संवाद’ को राज्य में उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण, उद्योग सहयोग और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम का समापन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन और उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन के सार-संक्षेप के साथ हुआ। ‘शिक्षा संवाद 2026’ ने राज्य में भविष्य उन्मुख, नवाचार- प्रधान और उद्योग-संरेखित उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed