51वें आईएफएफआई ने प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं की भागीदारी वाली अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी की घोषणा की

Photo Credit : Twitter @MIB_India

नई दिल्ली : भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 51वें संस्करण ने दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं की भागीदारी वाली अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी की घोषणा कर दी है। ज्यूरी में चेयरमैन के रूप में पाब्लो सेसर (अर्जेंटीना), प्रसन्ना वीथानेज (श्रीलंका), अबू बकर शाकी (ऑस्ट्रिया), प्रियदर्शन (भारत) और सुश्री रुबैयत हुसैन (बांग्लादेश) शामिल होंगे।

ज्यूरी के प्रतिष्ठित सदस्यों का संक्षिप्त विवरण:

पाब्लो सेसर अर्जेंटीना के फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने गंभीरता से प्रशंसा हासिल करने वाली फिल्मों इक्विनॉक्स, द गार्डन ऑफ रोसेस, लॉस डायोसेस डि एग्वा एंड एफ्रोडाइट, द गार्डन ऑफ द परफ्यूम्स का निर्माण करके अफ्रीकी सिनेमा में खासा योगदान किया है।

प्रसन्ना वीथानेज श्रीलंका के एक फिल्म निर्माता हैं। उन्हें श्रीलंका के सिनेमा जगत की तीसरी पीढ़ी के अग्रदूतों में गिना जाता है। उन्होंने फुल मून डे (1997), अगस्त सन (2003), फ्लॉवर्स ऑफ द स्काई (2008) और विद यू, विदआउट यू (2012) सहित आठ फीचर फिल्मों का निर्देशन किया है। साथ ही उन्होंने कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए तथा वह श्रीलंका में व्यावसायिक रूप से सफल भी रहे हैं। अपने शुरुआती थिएटर कार्य में, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय लेखकों के नाटकों का अनुवाद किया और निर्माण किया, फिल्मों के लिए विश्व साहित्य से जुड़े कार्यों को अपनाया। उन्होंने श्रीलंका में सेंसरशिप के खिलाफ संघर्ष किया और सिनेमा के शिक्षक के रूप में काम किया, उन्होंने युवा फिल्म निर्माताओं और उत्साही लोगों के लिए उप महाद्वीप में कई मास्टर क्लास चलाई।

अबू बकर शाकी या “ए बी” शॉकी इजिप्ट-ऑस्ट्रियाई लेखक और निर्देशक हैं। उनकी पहली फीचर फिल्म योमेद्दीन को 2018 के कान्स फिल्म महोत्सव में भागीदारी के लिए चुना गया था और इसे मुख्य प्रतिस्पर्धा भाग में दिखाया जाएगा तथा वह पाल्मे डिओर के लिए प्रतिस्पर्धा करेगी।

रुबैयत हुसैन बांग्लादेश की फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता हैं। वह मेहरजान, अंडर कंस्ट्रक्शन और मेड इन बांग्लादेश जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्रियदर्शन एक भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता हैं। तीन दशक लंबे करियर में उन्होंने विशेष रूप से मलयालम और हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की 95 से ज्यादा फिल्मों को निर्देशित किया है, साथ ही तमिल में छह और तेलुगू में दो फिल्में की हैं।

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