February 27, 2020

दिल्ली हिंसा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में मचा सियासी घमासान, जमकर आरोप-प्रत्यारोप

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नई दिल्ली
दिल्ली हिंसा की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी कि इस पर सियासी घमासान मच गया है। हिंसा को दिल्ली को किसने भड़काया? इसके जवाब में बीजेपी कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता सोनिया गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास पहुंचे और अमित शाह को हटाने की मांग की। इस बीच बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सीएए को लेकर लोगों को भड़काया। उन्होंने कहा कि 1984 में जिस तरह राजीव गांधी ने लोगों को भड़काया उसी तरह सोनिया ने भी लोगों को उकसाया। जावड़ेकर ने आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या को लेकर घिरे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन को लेकर कांंग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।

जावड़ेकर ने कहा है कि अब दिल्ली में स्थिति काबू में है, जांच की जा रही है और दोषियों को सजा दी जाएगी। ऐसी स्थिति में हर पार्टी की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि लोगों से बात की जाए और शांति स्थापित करने की कोशिश हो, लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं रहा है। विधानसभा में मुंख्यमंत्री उनका मजहब बता रहे हैं जो मारे गए हैं। कल सोनिया गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राष्ट्रपति के पास जाकर बीजेपी की शिकायत की।

'दो महीने से उकसाया जा रहा था लोगों को'
जावड़ेकर ने कहा कि ये दंगे सिर्फ दो दिन से नहीं हो रहे हैं, बल्कि इनके लिए दो महीनों से लोगों को भड़काया जा रहा था। 11 दिसंबर को कानून आया और 14 दिसंबर को कांग्रेस की रैली में सोनिया गांधी ने कहा कि ये आर-पार की लड़ाई है, इस पार या उस पार, इसका फैसला करना होगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि जो नहीं लड़ेगा वह कायर कहलाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस नागरिकता कानून का विरोध करने वालों के साथ है।

'राजीव गांधी के बयान जैसा सोनिया का बयान'
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस की गलतबयानी ने ही लोगों को उकसाया है। 1984 में राजीव गांधी ने कहा था कि बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती है। 2020 में सोनिया गांधी ने कहा है कि ये आर-पार की लड़ाई है। सोनिया गांधी के वाक्य राजीव गांधी के बयान जितने ही गंभीर हैं।

कांग्रेस के बाकी नेताओं को भी घेरा
बीजेपी ने कांग्रेस बाकी नेताओं पर भी हमला करते हुए कहा कि मणिशंकर शाहीन बाग गए और भड़काया। वह तो पाकिस्तान भी गए और कहा कि शाहीन बाग से आशा नजर आ रही है। शशि थरूर ने जाकर भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दे दिया। आज ताहिर हुसैन को हर मीडिया चैनल दिखा रहा है, उनके घर से असलहा मिला है, दंगे की तैयारी मिली है, लेकिन काग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही चुप हैं।

'अमानतुल्ला और वारिस पठान ने भी भड़काया'
उन्होंने आगे कहा कि अमानतुल्ला ने कहा था कि ये कानून आ गया तो आपको टोपी पहनना मना हो जाएगा, आखिर ये उकसाना नहीं तो फिर क्या था। शाहीन बाग में जिन्ना वाली आजादी के नारे लगे, इसे उकसाना नहीं तो फिर क्या कहें। 100 करोड़ पर 15 करोड़ भारी पड़ेंगे, ये भी तो उकसाने वाला ही बयान था। असम को अलग करने की बात से भी लोग भड़के हैं। हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी ऑफिशियल अंकित शर्मा की मौत हो गई, 56 पुलिसवाले जख्मी हैं, पुलिस पर हमला हो रहा है, पत्रकार पर हमला हो रहा है, लेकिन हम देख रहे हैं कि पार्टियां चुप हैं।

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