February 27, 2020

 नागर शैली में बनेगा भगवान राम का भव्य मंदिर

Last Updated on

 अयोध्या 
रामजन्मभूमि पर भव्य व दिव्य मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिन्दू परिषद के प्रस्तावित मंदिर मॉडल को ही स्वीकार करने के पीछे इतिहास को फिर से प्रतिष्ठापित करना ही उद्देश्य है। दरअसल 1528 ई. में आक्रांताओं ने रामजन्मभूमि पर रामलला के जिस मंदिर को नष्ट-भ्रष्ट किया था, वह मंदिर नागर शैली का ही था। इस नागर शैली के मंदिर को 11 वीं सदी में गहरवाल वंश के नरेश गोविंदचंद की ओर से बनवाया गया था।

यही कारण है कि तत्कालीन विहिप सुप्रीमो अशोक सिंहल ने इसी मंदिर के मॉडल का निर्माण कराकर देश भर के धर्माचार्यों व रामभक्तों के बीच स्वीकारोक्ति कराई थी। इसी के चलते विहिप नेतृत्व का बार-बार यही आग्रह था कि मंदिर के मॉडल को ही स्वीकार किया जाए। श्री सिंहल की दूरदृष्टि का ही परिणाम था कि उन्होंने विवाद के दौरान ही मंदिर के निर्माण की सामग्री भी जुटाई और पहली मंजिल के निर्माण के अंशो से सम्बन्धित पत्थरों को भी कारीगरों के माध्यम से तराशी करा दी।

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी इसकी पुष्टि कर चुके हैं। उनका कहना था कि प्रस्तावित में करीब दो लाख घनफुट पत्थरों के लगने का अनुमान था। इसके सापेक्ष करीब डेढ़ लाख घनफुट पत्थर तो नब्बे के दशक में ही राजस्थान के भरतपुर स्थित बंशीपहाड़ से खरीद लिए गए।

करीब तीन साल अस्थाई मंदिर में रामलला को करना होगा प्रवास
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय का कहना है कि प्रस्तावित मॉडल के अनुसार राम मंदिर का निर्माण दो साल में हो जाने का अनुमान है। इसलिए रामलला के स्थान परिवर्तन के बाद ऐसे अस्थाई मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें कम से कम तीन साल तक दोबारा कोई मरम्मत कार्य न करना पड़े। यह अस्थाई मंदिर फाइबर का ही होगा लेकिन इसकी भव्यता इस प्रकार की होगी कि बाहर से उसका आकलन करना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही इसके चारों ओर मजबूत सुरक्षा घेरा रहेगा। मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों को ही प्रवेश मिल सकेगा।

जन्मभूमि परिसर में युद्धस्तर पर शुरू हुआ कार्य
विराजमान रामलला के अस्थाई मंदिर की व्यवस्था के लिए निर्धारित स्थल पर युद्धस्तर पर कार्य शुरू हो गया है। यहां दो दर्जन से अधिक मजदूर सफाई व्यवस्था में लगाए गए है। इसके अलावा जेसीबी लगाकर पुराने भवन एवं सुरक्षा कर्मियों के बैठने के लिए निर्मित चबूतरे को ध्वस्त करा दिया गया है। यहां छह दिसम्बर 92 से पहले रखवाए गए राम मंदिर के पत्थरों को भी हटवा कर व्यस्थित तरीके से नियत स्थल पर रखवाने की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *