नगर का दलाल कोयला कबाड़ से हो रहा मालामाल, चूना लगाने से जब नही गली दाल तब भेड़िये ने ओढ़ ली शेर की खाल

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इंट्रो:कहावत बड़ी पुरानी है कि घूरे के दिन भी बदलते है। और ये तो बदलाव का दौर है और इस बदलाव के दौर में कौन कब बदल जाए ये तो भगवान भी नही जानता, इंसान की फितरत ही ईस्वर ने कुछ अजब बनाई है। कल तक नगर के ही प्रतिष्टित नेता की चौखट में नाक रगड़ने वाला आज बड़े नेता का दामन थाम कर इमरसन पेंट और  चूना लगा कर अपनी और अवैध कार्य करने वालो की लंबी फेहरिस्त लेकर किस को क्या करना है कि समझाइस दे रहा, नेता जी भी इस कि फ़ितरत से वाकिफ़ नही ऐसा लोगो को हज़म नही हो रहा , अब जब तक इनकी दाल गल रही तो सब इनके ही दफ्तर के चक्कर काट रहे। ख़ैर ये तो समय ही बताएगा कि इस दलाल की आँख खुली य  इस छुटभैय्या नेता की करतूत

 

छत्तीसगढ़, इस प्रदेश को धान के कटोरे के रूप में पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है। यहाँ के निवासियों की सादगी और भोले पन को देखकर बस मुँह से यही निकलता है कि इस प्रदेश के लोगो से सीख और शिक्षा लेने के लिए सालो कम पड़ जाएंगे, मेहनत और लगन की इक्छाशक्ति गजब की है, पल पल यहाँ के निवासियों की भोलापन और सादगी बरबस आप को अपने करीब और करीब लाती जाती है। कुछ लोग इस भोलेपन का फायदा उठाने में बड़ी महारत  हासिल किए हुए है।इन  के चक्कर मे फस कर कुछ लोग बुराई और गंदगी के दलदल में फस जाते है। फिर शुरू होता है अंतहीन और गर्त की तरफ जाने का लम्बा रास्ता, जहाँ से वापस आपाना असंभव सा हो जाता है। लेकिन सिक्को की खनक और महंगे शौक़ जुर्म की दुनिया की तरफ आज के युवाओं को ले जाते है इस का उन्हें कतई भी आभास नही होता, बस नेताओ को अपनी नेतागिरी चमकाने से जब फुर्सत मिले तब तो वो जनता के भले बुरे का पाठ पढ़ाएंगे, खैर यहाँ का तो दस्तूर ही निराला है अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता, दलालों से घिरे नेता जी की आँखों से कब पर्दा उठेगा ये तो समय ही बताएगा, आइए आगे चलते है इस पर गौर करते है।छत्तीसगढ़, ये नाम सुनते ही मन परप्रफुल्लित हो जाता है। मगर यहाँ कदम कदम पर दलाली और कमीशन के चक्कर मे लोग इस नेता को छोड़ नए नेता का दामन थाम रहे, कमीशन किसी भी मापदंड के अनुरूप हो ये तय नेता जी के दलाल तय करेंगे, कुछ साल पहले तक नामी नेता को गाड़ी बंगला उपलब्ध कराने वाले दलाल आज खुद को बड़े नेता का उत्तराधिकारी बताने में तुले है।
सट्टा में कितना कमीसन नेता जी को मिलेगा, अवैध कोयले की तस्करी कौन करेगा, कबाड़ ब  वारिस कौन बनेगा दलाल और नगर के अंदर बैठा भस्मासुर तय करेगा, इंसान दिन ब दिन इतने नीचे गिरता चला जाएगा इसकी कल्पना तो खुद उसके परिवार ने भी नही की थी,
आज नगर को अवैध कारोबारियों को सौपने पर आमादा दलाल रंग रोगन कर नेता जी का ख़ास बनने के चक्कर मे बड़े से लेकर छोटे स्तर तक के अधिकारी कर्मचारी को अपनी धौस दिखाने से कोई गुरेज नही दिखता, खैर ये तो वक़्त ही बताएगा कि नेता जी को कितने का डिस्टेम्पर, इमरसन और चूना दलाल के माध्यम से लगा, लेकिन हालात यही रहे तो अगली बार नेता जी दलाल को अपने लिए मील का पत्थर की जगह रोड़ा समझ कर अपने से पल्ला झाड़ते नज़र आएंगे प्रेस कांफ्रेंस अरेंज करने में उस्ताद ये दलाल , झुटे और मनगढंत आरोप लगा कर जनता को गुमराह करने के लिए नित नए हथकंडे अपना रहा, सट्टा ,कबाड़ , अवैध कोयला चोरों से मोटा कमीशन ले कर नेता जी से सेटिंग करवाने का पक्का पक्का भरोषा दिलाने वाले इस दलबदलू छुटभैय्या दलाल के चक्कर मे आ कर लोग गलत काम की ओर अपना रुख मोड़ रहे, सूत्रों की माने तो पारशा समझे जाने वाले लोग भी अपना लक आजमाने के लिए दलबदलू दलाल के झांसे में आ कर लकी से अन लकी बनते जा रहे, ख़ैर अब यहाँ के हालात ये है कि समय रहते लोग नही जागे तो इमरसन से चूना लगाने में दलाल कोई कमी नही करेगा अब ये नेता जी को तय करना है कि इस दीमक को अपने साए तले रखते है। य पेस्ट कंट्रोलर को बुलाकर अपने से अलग करने का उपाय करते है।लेकिन ये तो तय है कि इस दलाल के झांसे में आने के बाद लकी भी अन लकी ही साबित होगा, चूना कितना भी महंगा हो इमरसन की चमक के आगे खो जाता है।

एक मशहूर गीत जिसमे मे नूतन जी और राजकपूर जी पर फिल्माया गया था और लता जी ने अपनी आवाज़ के जादू से पिरोया था फ़िल्म का नाम तो ध्यान नही पर उस मशहूर गीत की दो लाइन आज भी मुझे याद है। आप के साथ साझा कर रहाऔर आज भी लोगो के लिए नसीहत देता है।

वो चाँद खिला वो तारे हँसे ये रात अजब मतवारी है

समझने वाले समझ गए है न समझे वो अनाड़ी है

 

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